22.7.17

किडनी फेल्योर का आयुर्वेदिक इलाज // Ayurvedic treatment of Kidney Failure



हमारी दोनों किडनियां एक मिनट में 125 मिलिलीटर रक्त का शोधन करती हैं। ये शरीर से दूषित पदार्थो को भी बाहर निकालती हैं। इस अंग की क्रिया बाधित होने पर विषैले पदार्थ बाहर नहीं आ पाते और स्थिति जानलेवा होने लगती है जिसे गुर्दो का फेल होना (किडनी फेल्योर) कहते हैं। इस समस्या के दो कारण हैं, एक्यूट किडनी फेल्योर व क्रॉनिक किडनी फेल्योर।
क्रॉनिक किडनी फेल्योर
शुरूआत में इस रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं होते लेकिन धीरे-धीरे थकान, सुस्ती व सिरदर्द आदि होने लगते हैं। कई मरीजों में पैर व मांसपेशियों में खिंचाव, हाथ-पैरों में सुन्नता और दर्द होता है। उल्टी, जी-मिचलाना व मुंह का स्वाद खराब होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
कारण : 
ग्लोमेरूनेफ्रायटिस, इस रोग में किडनी की छनन-यूनिट (नेफ्रॉन्स) में सूजन आ जाती है और ये नष्ट हो जाती है। डायबिटीज व उच्च रक्तचाप से भी किडनी प्रभावित होती है। पॉलीसिस्टिक किडनी यानी गांठें होना, चोट, क्रॉनिक डिजीज, किडनी में सूजन व संक्रमण, एक किडनी शरीर से निकाल देना, हार्ट अटैक, शरीर के किसी अन्य अंग की प्रक्रिया में बाधा, डिहाइड्रेशन या प्रेग्नेंसी की अन्य गड़बडियां।
एक्यूट किडनी फेल्योर
पेशाब कम आना, शरीर विशेषकर चेहरे पर सूजन, त्वचा में खुजली, वजन बढ़ना, उल्टी व सांस से दुर्गध आने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
कारण: 
किडनी में संक्रमण, चोट, गर्भवती में टॉक्सीमिया (रक्त में दूषित पदार्थो का बढ़ना) व शरीर में पानी की कमी।
आयुर्वेद में इलाज
आयुर्वेद में दोनों किडनियों, मूत्रवाहिनियों और मूत्राशय इत्यादि अवयवों को मूत्रवह स्रोत का नाम दिया गया है। पेशाब की इच्छा होने पर भी मूत्र त्याग नहीं करना और खानपान जारी रखना व किडनी में चोट लगना जैसे रोगों को आयुर्वेद में मूत्रक्षय एवं मूत्राघात नाम से जाना जाता है।
आयुर्वेदिक ग्रंथ "माधव निदान" के अनुसार रूक्ष प्रकृति व विभिन्न रोगों से कमजोर हुए व्यक्ति के मूत्रवह में पित्त और वायु दोष होकर मूत्र का क्षय कर देते हैं जिससे रोगी को पीड़ा व जलन होने लगती है, यही रोग मूत्रक्षय है। इसमें मूत्र बनना कम या बंद हो जाता है।
उपाय : 
तनाव न लें। नियमित अनुलोम-विलोम व प्राणायाम का अभ्यास करें।
ब्लड प्रेशर
ब्लड प्रेशर बढ़ने पर नमक, इमली, अमचूर, लस्सी, चाय, कॉफी, तली-भुनी चीजें, गरिष्ठ आहार, अत्यधिक परिश्रम, अधिक मात्रा में कसैले खाद्य-पदार्थ खाने, धूप में रहने और चिंता से बचें। काला नमक खाएं, इससे रक्त संचार में अवरोध दूर होता है।
किडनी
किडनी खराब हो तो ऎसे खाद्य-पदार्थ न खाएं, जिनमें नमक व फॉस्फोरस की मात्रा कम हो। पोटेशियम की मात्रा भी नियंत्रित होनी चाहिए। ऎसे में केला फायदेमंद होता है। इसमें कम मात्रा में प्रोटीन होता है। तरल चीजें सीमित मात्रा में ही लें। उबली सब्जियां खाएं व मिर्च-मसालों से परहेज करें।
औषधियां
आयुर्वेदिक औषधियों पुनर्नवा मंडूर, गोक्षुरादी गुग्गुलु, चंद्रप्रभावटी, श्वेत पर्पटी, गिलोय सत्व, मुक्ता पिष्टी, मुक्तापंचामृत रस, वायविडंग इत्यादि का सेवन विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। नियमित रूप से एलोवेरा, ज्वारे व गिलोय का जूस पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
डाइट कैसी हो
गाजर, तुरई, टिंडे, ककड़ी, अंगूर, तरबूज, अनानास, नारियल पानी, गन्ने का रस व सेब खाएं लेकिन डायबिटीज है तो गन्ने का रस न पिएं। इन चीजों से पेशाब खुलकर आता है। मौसमी, संतरा, किन्नू, कीवी, खरबूजा, आंवला और पपीते खा सकते हैं। रात को तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह पिएं।
 
सिरम क्रेटनीन व यूरिक एसिड बढ़ने पर
रोगी प्रोटीन युक्त पदार्थ जैसे मांस, सूखे हुए मटर, हरे मटर, फै्रंचबीन, बैंगन, मसूर, उड़द, चना, बेसन, अरबी, कुलथी की दाल, राजमा, कांजी व शराब आदि से परहेज करें। नमक, सेंधा नमक, टमाटर, कालीमिर्च व नींबू का प्रयोग कम से कम करें।
इस रोग में चैरी, अनानास व आलू खाना लाभकारी होता है।
लोक कहावत में सेहत का सार
एक लोक-कहावत के अनुसार- "खाइ के मूतै सोवे बाम। कबहुं ना बैद बुलावै गाम" यानी भोजन करने के बाद जो व्यक्ति मूत्र-त्याग करता है व बायीं करवट सोता है, वह हमेशा स्वस्थ रहता है और वैद्यों या डॉक्टरों की शरण में जाने से बचता है।
 विशिष्ट सलाह-    
बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी एक केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







नाम रोगी --  श्रीमती  तारा देवी गुप्ता W/O डॉ.अरविंद कुमार गुप्ता ,MBBS / बलिया  उत्तर प्रदेश


1)  जांच की रिपोर्ट  दिनांक  1/6/2015
सीरम  क्रीएटनिन    11.5/ mg/dl





2) जांच  की रिपोर्ट  दिनांक 18/6/2015
सीरम क्रेयटनिन   7.8 / mg/dl



















3)  जांच की रिपोर्ट  दिनांक   22/7/2015
सीरम  क्रीएटनिन   4.09 mg/dl 






















     


18.7.17

कफ दोष जनित रोगों के आयुर्वेदिक,घरेलु उपचार




क्या आपको पता है कि आपका शरीर कैसा है? आयुर्वेद में शरीर को तीन तरह का माना जाता है – वात, पित्त और कफ। आयुर्वेद के अनुसार, हम सभी का शरीर इन तीनों में से किसी एक प्रवृत्ति का होता है, जिसके अनुसार उसकी बनावट, दोष, मानसिक अवस्था और स्वभाव का पता लगाया जा सकता है। इन दोषों में किसी एक के भी ज्‍यादा होने से आपके ऊपर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। खैर, अगर आप कफ दोष का स्‍तर जानना चाहते हैं, तो हम आपको उसके लक्षण और उससे निपटने के उपाय बता रहे हैं।
कफ दोष क्या है?
कफ दोष तीनों दोषों में धीमा और संतुलित माना जाता है और ये अन्य दो दोषों के उत्पादन और कामकाज को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। ये आपकी स्किन को मॉश्‍चराइज्‍ड करने, जोड़ों को चिकना करने, लिबिडो बढ़ाने और इम्‍यूनिटी बढ़ाने में सहायक होता है। वात और पित्‍त के ज्‍यादा होने पर आपके ऊतकों (tissues) को नुकसान होने से बचाकर आपको मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूती प्रदान करता है।
कफ का असंतुलन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बुरा क्‍यों है?
कफ दोष के ज्‍यादा होने के बुरे प्रभावों में से एक मोटापा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, कफ प्रकृति वाले लोगों के शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है। इसलिए ये दोष आपके शरीर के लिए बुरा माना जाता है। आमतौर पर देखा गया है कि कफ प्रकार के शरीर वाले लोगों का वजन ज्‍यादा होता है और आम लोगों की तुलना में सुस्‍त होते हैं।
कफ दोष के लक्षण
कफ दोष बढ़ने से मुंह में मीठे का स्‍वाद, त्‍वचा का पीला होना, शरीर में ठंडापन, खुजली, पेशाब और पसीने से जुड़ी समस्‍या, बेचैनी, साइनसाइटिस, कोल्‍ड, मुंह और आंख से मोकस सिक्रेशन (mucous secretion) का बढ़ना, अस्‍थमा, गली की खराश, खांसी और डायबिटीज जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
 
मानसिक संकेत
मन की सुस्ती, काम के किसी भी प्रकार में उदासिनता, अवसाद।
व्यवहारिक संकेत
सुस्ती, ज्‍यादा नींद आना, झपकी आना, उत्‍सुकता, धीमी गति और लालच।
इसे ठीक करने के लिए क्‍या करें
कफ के लेवल को कम करने का आसान तरीका उल्‍टी करना है। इससे आपके पेट और छाती से कफ के निकलने में मदद मिलती है। उल्‍टी के लिए आयुर्वेदिक दवाएं खाएं। ये दवा कड़वी और खट्टी होती हैं।
तीखे, कड़वे, ड्राई और गर्म खाद्य पदार्थ भी कफ को संतुलित करने में सक्षम हैं।
पुराना शहद और तीखी चीजें विशेषकर आयुर्वेंदिक दवाएं जैसे असावा (asava) और अरिस्‍ता (arishta) फायदेमंद हैं।
गर्म रहें। सूखी गर्मी अच्‍छा उपाय है।
फोमेन्टेशन (fomentation) थेरेपी और सन बाथ लें।
ड्राई मसाज कराएं।
नहाने से पहले शरीर पर उबटन लगाएं।
रनिंग, वॉकिंग और स्विमिंग करें।
गर्म कपड़े पहनें और रात में देर तक जागें।
सुस्‍ती और आलस से बचें।

17.7.17

गर्भ निरोधक आयुर्वेदिक उपाय // Anti-contraceptive Ayurvedic remedies



    वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आयुर्वेद में आपके लिए कु‌छ घरेलू उपाय भी हैं।
आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी।
सेंधा नमक

त‌िल के तेल में सेंधा नमक का टुकड़ा डुबोएं और सेक्स के बाद इसे महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट पर कम से कम दो मिनट तक रखें।
इससे वीर्य गर्भाशय में पहुंचते ही नष्ट हो जाएगा। महिलाएं सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को गुनगुने पानी और सेंधा नमक से भी साफ कर सकती हैं। इससे भी गर्भ नहीं ठहरेगा।
गुड़हल का फूल
गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं। पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा।
पुदीने के पत्ते
सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर कर लें। सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें। महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा।
 
अरंडी के बीज
कैस्टर यानी अरंडी के बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद सफेद बीज को निकालें। सेक्स के 72 घंटे के भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है।
महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक इसका प्रभाव रहेगा।
आंवला चूर्ण
आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें। ये औषध‌ियां क‌िसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर म‌िल जाएंगी।
महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही असरदार होता है।

14.7.17

अनियमित मासिक धर्म( पीरियड्स) के घरेलू उपचार //Home Remedies for Irregular Menstrual Periods



   महिलाओं में मासिक धर्म या पीरियड का अनियमित होना एक आम समस्या है। इसके कई कारण हो सकते हैं, खराब जीवनशैली, असंतुलित खान-पान, अनीमिया (anemia), मेनोपोज़, वज़न का बढ़ना या घटना, हार्मोन संबंधी समस्या आदि। साथ ही मासिक धर्म के शुरू होने के समय और मेनोपोज़ के अवस्था के पहले हार्मोन संबंधी समस्या के कारण भी मासिक धर्म में अनियमितता हो सकती है। वैसे तो इस समस्या से निजात पाने के लिए कई प्रकार की दवाईयाँ बाजार में उपलब्ध है।
मासिक धर्म रुकने के कारण
सबसे ज्यादा मासिक धर्म की परेशानी उन लड़कियों में या महिलाओं में होती है जो आलसी होती है. इसलिए इस बात का थोड़ा ध्यान रखें, अगर आपका शरीर बहुत आलसी है और आप कुछ काम नहीं करतीं, सारे दिन आराम करते हैं तो आज से ही यह सब त्याग दें और घर के छोटे-मोटे कामकाज जरूर किया करें जिससे आपका मासिक धर्म चक्र सुचारु रूप से काम करता रहे 
<मासिक धर्म रुकने के कारण
सबसे ज्यादा मासिक धर्म की परेशानी उन लड़कियों में या महिलाओं में होती है जो आलसी होती है. इसलिए इस बात का थोड़ा ध्यान रखें, अगर आपका शरीर बहुत आलसी है और आप कुछ काम नहीं करतीं, सारे दिन आराम करते हैं तो आज से ही यह सब त्याग दें और घर के छोटे-मोटे कामकाज जरूर किया करें जिससे आपका मासिक धर्म चक्र सुचारु रूप से काम करता रहे मासिक धर्म के रुक जाने का एक प्रमुख कारण यही देखा गया है इसके अलावा शरीर में खून की कमी होना या मैथुन दोष होना या फिर कभी कभी कुछ महिलाएं या युवतियां महावारी के समय ज्यादा ठंडी चीजों का सेवन कर लेती हैं या फिर ठंड लग जाती है इसकी वजह से भी मासिक धर्म रुक सकता है और पानी में काफी देर तक भीगना भी इसका एक कारण हो सकता है
अनियमित मासिक के घरेलू उपचार -
हल्दी-
हल्दी एक ऐसा मसाला है जो न सिर्फ आपके मासिक धर्म को नियमित करने में मदद करता है बल्कि हार्मोन संबंधी समस्या से निजात दिलाने में भी मदद करता है। इसका इमानेगोज (emmenagogue ) गुण मासिक धर्म संबंधी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसका एन्टी-इन्फ्लेमटोरी गुण मासिक धर्म के दौरान दर्द से भी राहत दिलाने में मदद करता है।
विधि-
एक चौथाई छोटा चम्मच हल्दी को एक गिलास दूध में डालें और उसमें स्वाद लाने के लिए थोड़ा शहद या गुड़ डाल सकते हैं। जब तक कि समस्या से निजात न मिल जायें कुछ हफ़्तों तक इसको पी सकते हैं। आप हल्दी का इस्तेमाल साधारण रूप से खाने में भी कर सकते हैं।
तिल और गुड़-
तिल में लिग्नान (lignin) और ज़रूरी फैटी एसिड्स होते हैं जो हार्मोन संबंधी किसी भी समस्या को ठीक करने में मदद करता है। और गुड़ शरीर को गर्म करके मासिक धर्म को नियमित करने में मदद करता है।
विधि- एक मुट्ठी तिल को सूखा भून लें फिर उसको एक छोटा चम्मच गुड़ के साथ पीसकर पावडर जैसा बना लें। उसके बाद मासिक धर्म शुरू होने के दो हफ़्ते पहले से रोज एक छोटा चम्मच इस मिश्रण को खाली पेट खायें। ऐसा कुछ महीनों तक करें। ऐसे भी गुड़ खाने पर अनियमित मासिक धर्म का इलाज हो सकता है।
नोट- मासिक धर्म के दौरान तिल-गुड़ पावडर का इस्तेमाल न करें।
मासिक धर्म की अनियमितता के लक्षण
1. मासिक धर्म की अनियमितता के होने पर महिला के गर्भाशय में दर्द होता हैं.
2. मासिक धर्म की अनियमितता से महिला को भूख कम लगती हैं.
3. मासिक धर्म की अनियमितता के होने पर महिला के शरीर में दर्द रहता हैं. खासतौर महिला के स्तनों में, पेट में, हाथ – पैर में तथा कमर में.
4. मासिक धर्म की अनियमितता के होने पर महिला को अधिक थकान भी महसूस होती हैं.
5. मासिक धर्म के ठीक समय पर न होने के कारण महिला को पेट में कब्ज तथा दस्त की भी शिकायत हो जाती हैं
6. मासिक धर्म की अनियमितता होने से महिला के शरीर में स्थित गर्भाशय में रक्त का थक्का बन जाता हैं.
अनियमित मासिक धर्म से बचने के लिए क्या उपाय करें
* मासिक धर्म की अनियमितता को ठीक करने के लिए महिलाएं गरम दूध और अजवायन का सेवन कर सकती हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए एक गिलास दूध लें और उसके साथ 8 से 10 ग्राम तक अजवायन लें. अब अजवायन को खाकर उसके ऊपर से दुध पी लें. मासिक धर्म की अनियमितता ठीक हो जाएगी.
* मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने के लिए आप दालचीनी के चुर्ण का भी प्रयोग कर सकते हैं. इस रोग की समस्या से निदान पाने के लिए 4 या 5 ग्राम चुर्ण का पानी के साथ रोजाना का सेवन करें. रोजाना दालचीनी के चुर्ण का सेवन करने से मासिक धर्म में किसी भी प्रकार की समय नहीं होती तथा अगर आपके शरीर में मासिक धर्म की अनियमितता से दर्द हो रहा हो तो वह भी ठीक हो जाता हैं.
*मासिक धर्म की अनियमितता से आराम पाने के लिए आप राई (सरसों) के दानों का भी उपयोग कर सकते हैं. मासिक धर्म की अनियमितता को खत्म करने के लिए राई के दानों को पीस लें. अब राई के इस चुर्ण को खाना खाते समय पहले के कुछ निवालों के साथ खाएं. राइ का सेवन खाने के साथ करने से मासिक धर्म से सम्बन्धित सभी प्रकार की दिक्कतें ठीक हो जाती हैं.
* यदि किसी महिला को मासिक धर्म ठीक समय पर न हो तो वह गाजर के रस का उपयोग कर सकती हैं. इस समस्या से निदान पाने के लिए गाजर के रस के साथ पानी का सेवन करें. दिन में दो बार गाजर के रस के साथ पानी को पीने से मासिक धर्म ठीक समय पर होंगे.
*मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या को दूर करने के लिए आप गाजर के रस का या गाजर के सूप का भी सेवन कर सकते हैं. गाजर के रस का या गाजर के सूप को पीने से मासिक धर्म की अनियमितता से छुटकारा जल्दी मिल जाता हैं.
*तुलसी के पत्तों की ही भांति तुलसी के बीज भी बहुत ही उपयोगी होते हैं. मासिक धर्म के नियमित समय पर न होने पर आप इन बीजों का प्रयोग कर सकते हैं. मासिक धर्म की इस समस्या से राहत पाने के लिए तुलसी के बीजों को पानी में डालकर उबाल लें. उबालने के बाद पानी को उतारकर रख दे. थोड़ी देर के बाद इस पानी का सेवन करें. आपको अनियमितता से छुट्टी मिलेगी.

9.7.17

गाँजा के अद्भुत लाभ// The amazing benefits of marijuana


   मारिजुआना, हशीश, कैनाबिस या गांजा, किसी भी नाम से पुकारें, नशा करने वाले इसके लिए बड़ा दाम देते भी नहीं कतराते. बहुत ज्यादा मात्रा में इसे लेने से दिमाग का संतुलन बिगड़ सकता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने दिमाग में ही इसका तोड़ ढूंढ लिया है.
गांजे को सेहत के लिए नुकसान दायक माना जाता है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अगर गांजे की सही खुराक ली जाये तो वह सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। गांजे की सही खुराक लेने पर इससे सेहत से जुड़े कई फायदे होते हैं। गांजा बेहतरीन पेनकिलर का काम करता है, इतना ही नहीं इससे ब्रेन स्ट्रोक और कैंसर जैसी बीमारियों से भी लड़ने में मदद मिलती है। आइए जानें नुकसानदायक माने जाने वाले गांजे के सेहत से जुड़े फायदों के बारे में।
गांजा के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
भांग, चरस या गांजे (मारिजुआना) की लत शरीर के लिए नुकसानदायक होती है यह बात तो लगभग हम सभी जानते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अगर गांजे की सही खुराक ली जाये तो वह सेहत के लिए लाभकारी हो सकत है। यह हमें कई तरह की बीमारियों से बचाता है। इस बात की पुष्टि विज्ञान ने भी की है। आइए गांजे से जुड़े स्‍वास्‍थ्‍य लाभों की जानकारी लें।
दर्द निवारक
शुगर से ग्रस्‍त ज्यादातर लोगों के हाथ या पैरों की नर्व्स को नुकसान होता हैं और इससे बदन के कुछ हिस्से में जलन का अनुभव होता है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के अनुसार नर्व डैमेज होने से उठने वाले दर्द में गांजा आराम देता है। एक अन्‍य शोध के अनुसार गांजा पीने से उन मरीजों को पुराने पड़ चुके दर्द से काफी राहत मिल सकती है जिनकी नर्व्स डैमेज हो चुकी हैं। ऐसे दर्द के लिए असरदायक दवा की कमी है। इस तरह के दर्द से प्रभावित कुछ मरीजों का कहना है कि उनके रोग के जो लक्षण हैं, उसमें गांजा लाभकारी सिद्ध हुआ है।
 
हेपेटाइटिस सी के साइड इफेक्ट से राहत
थकान, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, भूख न लगना और डिप्रेशन, ये हेपेटाइटिस सी के इलाज में सामने आने वाले साइड इफेक्ट हैं। यूरोपियन जरनल ऑफ गैस्ट्रोलॉजी एंड हेपाटोलॉजी के अनुसार गांजा की मदद से 86 प्रतिशत मरीज हैपेटाइटिस सी का इलाज पूरा करवा सके। माना गया कि गांजा ने इसके साइड इफेक्ट्स को कम किया।
मोतियाबिंद से राहत
गांजा का उपयोग आंखों के रोग मोतियाबिंद को रोकने और इसके इलाज के लिए किया जाता है। इस बीमारी में आंख की पुतली पर दबाव बढ़ने लगता है, ऑप्टिक नर्व्स को नुकसान होता है और दृष्टि को नुकसान हो सकता है। अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार गांजा ग्लूकोमा के लक्षण दूर करता है। गांजा ऑप्टिक नर्व से दबाव हटाता है।
कैंसर पर असर और इम्‍यूनिटी बढ़ाये
गांजा कैंसर से लड़ने में सक्षम होता है। अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार गांजा में पाया जाने वाला कैनाबिनॉएड्स तत्व कैंसर की कोशिकाओं को मारने में सक्षम हैं। यह ट्यूमर के विकास के लिए जरूरी रक्त कोशिकाओं को रोक देते हैं।
कैनाबिनॉएड्स से कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और लीवर कैंसर का सफल इलाज होता है। इसके अलावा कभी-कभी हमारी इम्‍यूनिटी रोगों से लड़ते हुए स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारने लगती है। इससे अंगों में इंफेक्शन फैल जाता है। इसे ऑटोइम्यून डिजीज कहते हैं। 2014 में साउथ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी के अनुसार गांजा में मिलने वाला टीएचसी, इंफेक्‍शन फैलाने के लिए जिम्मेदार मॉलिक्यूल का डीएनए बदल देता है। तब से ऑटोएम्यून के मरीजों को गांजा की खुराक दी जाती है।
 
दिमाग की रक्षा
गांजा दिमाग के लिए भी बहुत अच्‍छा होता है। नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह साबित किया है कि गांजा स्ट्रोक की स्थिति में ब्रेन को नुकसान से बचाता है। गांजा स्ट्रोक के असर को दिमाग के कुछ ही हिस्सों में सीमित कर देता है। साथ ही नींद और बेचैनी के मामलों में भी गांजा के इस्तेमाल से सुधार नजर आया। इसके अलावा एक अन्‍य शोध के अनुसार गांजे में मिलने वाले तत्व एपिलेप्सी अटैक को टाल सकते हैं।
    दरअसल इंसानी दिमाग में प्राकृतिक रूप से एक हार्मोन मिलता है जिसका नाम है प्रेग्निनोलोन. नई रिसर्च की मानें तो यही हार्मोन हमें गांजे की लत से बचा सकता है. फ्रांस में चूहों पर हुए टेस्ट में देखा गया कि इस हार्मोन के कारण गांजे की मदहोशी नहीं छाई. इसी खूबी की वजह से वैज्ञानिकों को लगता है कि यह हार्मोन गांजे की लत से बचाने में बहुत मददगार साबित हो सकता है.
     एक ओर तो गांजे का इस्तेमाल करने वाले लोग इसके कई फायदों की वकालत करते हैं, वहीं दूसरी ओर डॉक्टर इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि लगातार गांजा पीने से इंसान को अवसाद या डिप्रेशन, फेफड़ों की बीमारी या फिर दौरे भी पड़ सकते हैं. बहुत से मामलों में पाया गया है कि गांजे के लगातार इस्तेमाल से याददाश्त कमजोर हो जाती है, तार्किक समझ और फैसले लेने में मुश्किल हो सकती है.
    कैनाबिनॉएड्स से कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और लीवर कैंसर का सफल इलाज होता है। इसके अलावा कभी-कभी हमारी इम्‍यूनिटी रोगों से लड़ते हुए स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारने लगती है। इससे अंगों में इंफेक्शन फैल जाता है। इसे ऑटोइम्यून डिजीज कहते हैं। 2014 में साउथ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी के अनुसार गांजा में मिलने वाला टीएचसी, इंफेक्‍शन फैलाने के लिए जिम्मेदार मॉलिक्यूल का डीएनए बदल देता है। तब से ऑटोएम्यून के मरीजों को गांजा की खुराक दी जाती है।
    इस बात का भी डर जताया जा रहा है कि कहीं आसानी से गांजा उपलब्ध कराने से नशेड़ी लोगों की लत और इसकी वजह से अपराध और ना बढ़ जाएं. इस समय दुनिया के करीब 20 देशों में कानूनी रूप से गांजा बेचा जा रहा है. डर यह भी है कि कहीं मारिजुआना बेचने वाले मिलकर इतना संगठित कारोबार न जमा लें कि सिगरेट और तंबाकू के बाद सरकार को इससे होने वाली बीमारियों से भी निपटने में संघर्ष करना पड़े.

8.7.17

गर्म पानी पीने के अद्भुत फायदे //Wonderful Benefits of Drinking Hot Water



सब जानते हैं कि पानी पीना शरीर के लिए जरूरी है। अच्छी हेल्थ के लिए दिन में कम से कम 5 से 6 लीटर पानी पीना चाहिए। लेकिन ठंडे पानी की बजाय गर्म पानी के फायदे ज्यादा हैं। कई रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि गर्म पानी पीने से शरीर के अंदर जमा जहरीले तत्व बाहर आ जाते हैं। साथ ही कब्ज व पेट संबंधी कई रोग ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा गर्म पानी के क्या फायदे हैं, हम आपको बताते हैं।
गरम पानी के शारीरिक लाभ
भूख बढ़ाए :
जिन लोगों को भूख न लगने की समस्या होती है, उन्हें एक ग्लास गर्म पानी में काली मिर्च, नमक और नींबू का रस डालकर पीना चाहिए। इससे भूख बढ़ जाती है।
मुंहासे :
मुंहासों की समस्या लड़कियों में ही नहीं आजकल लड़कों में भी देखी जा सकती है। इससे बचने के लिए सुबह गर्म पानी पिएं। इससे पिंपल्स से भी छुटकारा मिल जाएगा।खाली पेट गरम पानी पीने से मूत्र सम्बन्धी रोग समाप्त हो जाते हैं | दिल की जलन कम हो जाती है | वात से उत्पन्न रोगों में गरम पानी पीना अमृत के बराबर फायदेमंद होता है |
गरम पानी के रोजाना सेवन से ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है | गरम पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है और पसीने के माध्यम से शरीर के सारे विषैले पदार्थ बाहर हो जाते हैं |
झुर्रियां कम करता है :
उल्टा-सीधा खाना खाने से शरीर के अंदर विषैले पदार्थ जम जाते हैं, जो शरीर को अंदर से कमजोर कर देते हैं। इंसान जल्दी बूढ़ा लगने लगता है। इस समस्या को रोकने के लिए सुबह गर्म पानी पिएं। यह आपकी त्वचा की झुर्रियों को कम करता है, साथ ही पेट भी साफ रखता है।
प्रतिदिन एक गिलास गर्म पानी सिर की कोशिकाओं के लिए एक गजब के टॉनिक का काम करता है | सिर के स्कैल्प को हाइड्रेट करता है जिससे स्कैल्प सूखने की परेशानी समाप्त हो जाती है |
वजन घटाने में गर्म पानी का बहुत योगदान है | खाना खाने के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से मेटाबोलिज्म बढ़ता है | अगर गर्म पानी में थोड़ा नींबू का रस एवं कुछ बूंदे शहद की मिला दी जाए तो इससे बॉडी स्लिम हो जाती है |
हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए गर्म पानी एक गजब की औषधी के रूप में काम करता है |
गर्म पानी पीने से शरीर में शक्ति का संचार होता है | इससे खांसी और सर्दी सम्बन्धी रोग बहुत जल्दी दूर हो जाते हैं |
अगर शरीर के किसी हिस्से में गैस की वजह से दर्द हो रहा है तो एक गिलास गरम पानी पीने से गैस बाहर निकल जाती है |


बालों के लिए है फायदेमंद
इसके अलावा गर्म पानी का सेवन बालों और त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इससे बाल चमकदार बनते हैं और यह इनकी ग्रोथ के लिए के लिए भी बहुत फायदेमंद है.
दमा,
हिचकी और खराश आदि रोगों में तले एवं भुने पदार्थो के सेवन के बाद गर्म पानी पीना फायदेमंद होता है |
सुबह-सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर को विटामिन C मिलता है | गर्म पानी एवं नींबू का मिश्रण शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करता है साथ ही साथ पी.एच. का स्तर भी संतुलित रहता है |
हमारी मांसपेशियों का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है। इसलिए पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है।
बीमारियों से भी दूर रखता है पानी:
बढ़ती उम्र थाम लें
चेहरे पर पड़ती झुर्रियां आपको परेशान करने लगती हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है. आज ही से गर्म पानी पीना स्‍टार्ट कर दें और कुछ ही हफ्तों में देंखे इसका कमाल. त्‍वचा में कसाव आने लगेगा और यह चमकदार भी हो जाएगी.
वजन कम करता है :
अगर वजन कम करना चाहते हैं, तो गर्म पानी पीना शुरू कर दें। ये आपको बिना व्यायाम के भी फिट रखेगा। बस रोज सुबह उठकर खाली पेट गर्म पानी पिएं। गर्म पानी शरीर से अतिरिक्त चर्बी को घटा देता है और आपका शरीर स्लिम होने लगता है।
पीरियड्स में आराम :
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अक्सर पेट दर्द की समस्या होती है। क्योंकि इस दौरान पैन मसल्स में खिंचाव होता है जो पेट दर्द का कारण बनता है। ऐसे में 1 गिलास गुनगुना पानी पीने से दर्द से राहत मिलती है।
पेट साफ रखे :
गर्म पानी का एक फायदा यह भी है कि यह पेट को साफ रखता है, जिससे पाचन तंत्र ठीक रहता है। इससे पेट ठीक रहता है और कब्ज और पेट दर्द में आराम मिलता है।

 

बॉडी करे डिटॉक्‍स
गर्म पानी पीने से बॉडी को डिटॉक्‍स करने में मदद मिलती है और यह शरीर की सारी अशुद्धियां को बहुत आसानी से साफ कर देता है. गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ने लग जाता है, जिससे पसीना आता है और इसके माध्यम से शरीर की अशुद्धियां दूर हो जाती हैं.
नाक और गले की समस्या में आराम :
अगर नाक और गले में दिक्कत हो तो सांस लेने व कुछ खाने में बड़ी परेशानी होती है। खराश और खांसी भी बड़ी समस्या होती है। इन सभी रोगों से बचने और आराम पाने के लिए गर्म पानी से गरारा करें और गर्म पानी पिएं।
सर्दी-जुकाम से राहत
बेमौसम भी आपको अगर छाती में जकड़न और जुकाम शिकायत रहती है तो गर्म पानी पीना आपके लिए रामबाण से कम नहीं है. गर्म पानी पीने से गला भी ठीक रहता है. इसके सेवन से आराम मिलता है.
जोड़ों का दर्द करे दूर
गर्म पानी जोड़ों को चिकना बनाता है और जोड़ों का दर्द भी कम करता है. हमारी मांसपेशियों का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है इसलिए पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है.
अब बताते हैं गरम पानी पीने के  क्या नुकसान हो सकते हैं?
अंदरुनी अंगों को नुकसान
एक इंसान को दिन में 6-10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है, यह शरीर को संतुलित रखता है। मगर जब आप इससे ज्यादा पानी पीते है तो यह आपके अंदरुनी अंगो को नुकसान पहुंचाने लगती है।
होठों का जलना
गर्म पानी पीते हुए अक्सर लोगों के होंठ जल जाते हैं। इसलिए हमेशा पानी का छोटा घूंट लेकर पिए। ताकि वह आपके होंठ न जले।
आंतरिक अंग घायल
गर्म पानी पीने से शरीर के आंतरिक अंग जल सकते है, क्योंकि गर्म पानी का तापमान आपके शरीर के अंग से बिलकुल अलग होता है।
प्यास लगने पर ही पानी पीना
पानी पीने के फायदे को देखते हुए लोग जरुरत से ज्यादा पानी पीने लगते हैं। मगर ऐसा नहीं करना चाहिए जब आपको प्यास लगे तभी पानी पीना चाहिए। क्योंकि बिना प्यास के पानी पीने की वजह से आपके दिमाग की नसों में सूजन आ सकता है।
 
सोते हुए न पीए पानी
सोते हुए गर्म पानी नहीं पीना चाहिए। इसकी वजह से आपकी रात की निंद खराब होती है, और आपको बार-बार उठकर रेस्टरुम जाना पड़ता है।
किडनी खराब
किडनी शरीर के विषाक्त पदार्थों को निकालने का काम करती है। मगर ज़रूरत से ज़्यादा पानी पीने से किडनी खराब हो जाती है, क्योंकि किडनी पर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
बाय-पास सर्जरी में मनाही
जिन लोगों की बाय-पास सर्जरी हुई होती है, उनमें से कुछ मामलों में भी डॉक्टर्स मरीजों को पानी कम पीने की सलाह देते हैं।
पाचन की समस्या
जरूरत से ज्यादा पानी पीने से हमारे शरीर में मौजूद वह पाचन रस काम करना बंद कर देता है, जिससे खाना पचता है। इस वजह से खाना देर से पचने लगता है और कई बार खाना पूरी तरह से डाइजेस्ट भी नहीं हो पाता है।

7.7.17

दांत के दर्द के घरेलू उपचार //Simple home remedies for toothache





   एक बात तो जाहिर है कि बाजार में उपलब्ध तरह-तरह के टूथ पेस्ट अपने बड़े-बड़े वादों पर खरे नहीं उतरे हैं। प्राकृतिक उपचार दंत पीडा में लाभकारी होते हैं। सदियों से हमारे बडे-बूढे दांत के दर्द में घरेलू पदार्थों का उपयोग करते आये हैं। यहां  ऐसे ही प्राकृतिक उपचारों की चर्चा कर रहे हैं।
   असल में दांतों से जुड़ी हर समस्या के पीछे हमारी गलत खानपान और रहन-सहन की आधुनिक जीवन शैली है। चाय-कॉफी जैसे बेहद गर्म पेय तथा कोलड्रिक्स दोनों ही दांतों की जड़ों को कमजोर और खोखला कर देते हैं। सात्विक, ताजा तथा प्राकृतिक खानपान और सफाई के प्रति जागरूकता ही हमें दातों की समस्या से स्थाई छुटकार दिला सककी है। तो आइये हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार के तरीके जो यकीनन आपको दांतों से जुड़ी हर दिक्कत से मुक्ति दिलाएंगे....
    आजकल गलत खान-पान और ठीक से देखरेख न करने के कारण लोगों में दांत के दर्द की समस्या आम हो गई है। छोटे छोटे बच्चों को अक्सर दांत में दर्द होने की शिकायत होती है। आयुर्वेद में दांतों में दर्द की समस्या का बहुत आसान उपाय बताया है।
आयुर्वेद में एक कहावत है-
नमक महीन लीजिए, अरु सरसों का तेल।
नित्य मले रीसन मिटे, छूट जाए सब मैल।

सैंधा नमक को कपड़े से छान लें। नमक को हाथ पर रखकर उसमें सरसों का तेल मिला लें। इस मिश्रण से दातों पर हल्के-हल्के मसाज करें बाद में साफ पानी से कुल्ला कर लें। इस विधि को अपनाने से आपको दातों की कई समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इससे दातों में दांतों में पीलापन नहीं आता, दांत साफ और मजबूत होते हैं, कीड़े नहीं लगते, दर्द, मसूड़ों की सूजन, इनसे खून निकलना बन्द हो जाता है।
मसूढों और जबडों में होने वाली पीडा को दंतशूल से परिभाषित किया जाता है। हममें से कई लोगों को ऐसी पीडा अकस्मात हो जाया करती है। दांत में कभी सामान्य तो कभी असहनीय दर्द उठता है। रोगी को चेन नहीं पडता। मसूडों में सूजन आ जाती है। दांतों में सूक्ष्म जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने से स्थिति और बिगड जाती है। मसूढों में घाव बन जाते हैं जो अत्यंत कष्टदायी होते हैं।दांत में सडने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और उनमें केविटी बनने लगती है।जब सडन की वजह से दांत की नाडियां प्रभावित हो जाती हैं तो पीडा अत्यधिक बढ जाती है।
 
दन्तशूल के आयुर्वेदिक, घरेलू उपचार 
* प्याज कीटाणुनाशक है। प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है। एक छोटा प्याज नित्य भली प्रकार चबाकर खाने की सलाह दी जाती है। इससे दांत में निवास करने वाले जीवाणु नष्ट होंगे।
*लौंग के तैल का फ़ाया दांत की केविटी में रखने से तुरंत फ़ायदा होगा। दांत के दर्द के रोगी को दिन में ३-४ बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।
*नमक मिले गरम पानी के कुल्ले करने से दंतशूल नियंत्रित होता है। करीब ३०० मिलि पानी मे एक बडा चम्मच नमक डालकर तैयार करें।दिन में तीन बार कुल्ले करना उचित है।
* पुदिने की सूखी पत्तियां पीडा वाले दांत के चारों ओर रखें। १०-१५ मिनिट की अवधि तक रखें। ऐसा दिन में १० बार करने से लाभ मिलेगा।
*बाय बिडंग १० ग्राम,सफ़ेद फ़िटकरी १० ग्राम लेकर तीन लिटर जल में उबालकर जब मिश्रण एक लिटर रह जाए तो आंच से उतारकर ठंडा करके एक बोत्तल में भर लें। दवा तैयार है। इस क्वाथ से सुबह -शाम कुल्ले करते रहने से दांत की पीडा दूर होती है और दांत भी मजबूत बनते हैं।

*लहसुन में जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें फ़िर इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं। तत्काल लाभ होता है। प्रतिदिन एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है।
*हींग दंतशूल में गुणकारी है। दांत की गुहा(केविटी) में थोडी सी हींग भरदें। कष्ट में राहत मिलेगी।
*तंबाखू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दंतशूल से मुक्ति मिल जाती है।
* बर्फ़ के प्रयोग से कई लोगों को दांत के दर्द में फ़ायदा होता है। बर्फ़ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ़ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।
*कुछ रोगी गरम सेक से लाभान्वित होते हैं। गरम पानी की थैली से सेक करना प्रयोजनीय है।
* दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट जैसा बनाले। इस पेस्ट से दंत मंजन करते रहने से दंतशूल का निवारण होता है।
* मेरा अनुभव है कि विटामिन सी ५०० एम.जी. दिन में दो बार और केल्सियम ५००एम.जी दिन में एक बार लेते रहने से दांत के कई रोग नियंत्रित होंगे और दांत भी मजबूत बनेंगे।
* मुख्य बात ये है कि सुबह-शाम दांतों की स्वच्छता करते रहें। दांतों के बीच की जगह में अन्न कण फ़ंसे रह जाते हैं और उनमें जीवाणु पैदा होकर दंत विकार उत्पन्न करते हैं।
*शकर का उपयोग हानिकारक है। इससे दांतो में जीवाणु पैदा होते हैं। मीठी वस्तुएं हानिकारक हैं। लेकिन कडवे,ख्ट्टे,कसेले स्वाद के पदार्थ दांतों के लिये हितकर होते है। नींबू,आंवला,टमाटर ,नारंगी का नियमित उपयोग लाभकारी है। इन फ़लों मे जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। मसूढों से अत्यधिक मात्रा में खून जाता हो तो नींबू का ताजा रस पीना लाभकारी है।
*हरी सब्जियां,रसदार फ़ल भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।
*दांतों की केविटी में दंत चिकित्सक केमिकल मसाला भरकर इलाज करते हैं। सभी प्रकार के जतन करने पर भी दांत की पीडा शांत न हो तो दांत उखडवाना ही आखिरी उपाय है।
 
दांतों के पस को ठीक करने के घरेलू उपचार
दांतों में पस मुख्य रूप से मसूड़ों में जलन और टूटे हुए दांत के कारण होता है। दांतों में पस मुख्य रूप से एक प्रकार का संक्रमण होता है जो मसूड़ों और दांतों की जड़ों के बीच होता है तथा इसके कारण बहुत अधिक दर्द होता है। इसके कारण दांत के अंदर पस बन जाता है जिसके कारण दांत में दर्द होता है। जिस दांत में पस हो जाता है उसमें बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है और वही बढ़ता रहता है जिससे उन हड्डियों में संक्रमण हो जाता है जो दांतों को सहारा देती हैं। यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया गया तो इसके कारण जीवन को खतरा हो सकता है। 
स्वस्थ मसूड़ों के लिए टिप्स-
 दांतों में पस होने के कारण जो दर्द होता है वह असहनीय होता है तथा इस दर्द को रोकने के लिए लोग कई तरह के उपचार करते हैं परंतु अंत में दर्द बढ़ जाता है। यदि आप भी मसूड़ों की इस बीमारी से ग्रसित हैं तो हम आपको बताएँगे कि आपको क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं। पहले आपको इस बीमारी के लक्षण तथा कारण पहचानने होंगे। दांतों में पस होने के कारण मसूड़ों की बीमारी मुंह की सफाई ठीक से न करना प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होना टूटा हुआ दांत मसूड़ों में सूजन और जलन दांतों में संक्रमण बैक्टीरिया कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा चिपचिपे पदार्थ अधिक मात्रा में खाना|

6.7.17

बवासीर के प्राकृतिक घरेलू उपचार // Hemorrhoids Easy Home Remedies


आज की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में कई लोग बवासीर से पीड़ित हैं. बवासीर का मुख्य कारण अनियमित खानपान और कब्ज है.
बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं.
 यह दो तरह का होता है -:
. अंदरूनी बवासीर-
 इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता है, लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है. 
2. बाहरी बवासीर- 
इसमें सूजन को बाहर से महसूस किया जा सकता है. इसकी पहचान बहुत हीं आसान है.
अगर आपको भी मल त्यागते वक्त बहुत दर्द होता है, मलद्वार से खून आता है या खुजली होती है, तो आपको बवासीर है.
 
बवासीर का  घरेलू इलाज :
*रेशेदार चीजें नियमित खाना शुरू कीजिए, इन्हें अपने दैनिक भोजन का एक आवश्यक अंग बना लीजिए.
*हर दिन 8-10 ग्लास पानी जरुर पिएँ.
*खाना समय से खाएँ.
*रात में 100 gram किशमिश पानी में फूलने के लिए छोड़ दें. और फिर सुबह में जिस पानी में किशमिश
को फुलाया है, उसी पानी में किशमिश को मसलकर खाएँ. कुछ दिनों तक लगातार इसका उपयोग करना
बवासीर में अत्यंत लाभ करता है.
*50 gram बड़ी इलायची लीजिए और इसे भून लीजिए. जब यह ठंडी हो जाए, तो इसे अच्छी तरह से पीस लीजिए.और फिर हर दिन सुबह खाली पेट में इसे कुछ दिनों तक नियमित पिएँ. यह आपको बहुत फायदा पहुंचाएगा.
*बवासीर के ऊपर अरंडी का तेल लगाने से राहत मिलती है.
*एक चम्मच मधु में ¼ चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर खाने से फायदा पहुँचता है.
*अगर आपको बवासीर है, तो आपको खट्टे, मिर्ची वाले, मसालेदार और चटपटे खाने से कुछ दिनों
के लिए परहेज करना पड़ेगा. जबतक कि आपका बवासीर पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है.
*डेढ़ से दो लीटर मट्ठा लीजिए और इसमें 50 gram जीरा पाउडर और थोड़ा सा नमक मिला लीजिए.
और जब-जब आपको प्यास लगे तो पानी की जगह इस मट्ठे को पिएँ. कुछ दिनों तक ऐसा करने से
बवासीर का मस्सा कम हो जाता है.
*दो सूखे अंजीर शाम को पानी में भिगो दे। सवेरे के भगोये दो अंजीर शाम चार-पांच बजे खाएं। एक घंटा आगे पीछे कुछ न लें। आठ दस दिन के सेवन से बादी और खुनी हर प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती है।
*आम की गुठली के अंदर के भाग, और जामुन की गुठली के अंदर के भाग को सूखा लें.
फिर इन दोनों का चूर बना लें. और फिर इस चूर को एक चम्मच हल्के गर्म पानी या मट्ठे के साथ
कुछ दिन तक नियमित पिएँ. यह आपको लाभ पहुंचाएगा.
*राजमा, बीन्स, दालें और मटर को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाएँ.
*फलों के ताजा जूस और सब्जियों के सूप नियमित पिएँ.
*हर दिन सुबह केले का सेवन करें.

*शराब न पिएँ, और चाय था कॉफ़ी का भी कम सेवन करें.
*निम्बू, सेव, संतरा, और दही इत्यादि का सेवन करें.
*हर दिन व्यायाम करें.
*रात में खजूर को फूला लें. और सुबह फूला हुआ खजूर खाएँ.
यह पेट को ठीक रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
*बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल, मूंग की खिचड़ी ले। देसी घी प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज न होने दे। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार, उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थो के सेवन से बचे।
* खुनी बवासीर में छाछ या दही के साथ कच्चा प्याज ( या पीसी हुयी प्याज की चटनी ) खाना चहिए।
* रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घटे बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकारी है।
* बवासीर चाहे कैसी भी हो बड़ी हो अथवा खुनी, मूली भी अक्सीर है। कच्ची मूली ( पत्तो सहित ) खाना या इसके रस का पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषो को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।
*बवासीर को जड़ से दूर करने के लिए और पुन: न होने के लिए छाछ सर्वोत्तम है। दोपहर के भोजन के बाद छाछ में डेढ़ ग्राम ( चौथाई चम्मच ) पीसी हुई अजवायन और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है और नष्ट हुए बवासीर के मस्से पुन: उत्प्न्न नही होते।

 
बवासीर के मस्सो पर लगाने के लिए तेल
एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले। अगर कपूर की मात्रा 10 ग्राम हो तो अरंडी का तेल 80 ग्राम होना चाहिए। मतलब 8 गुना अगर कपूर 5 ग्राम हैं तो तेल 40 ग्राम।पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें। इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।
बवासीर के मस्से सूजकर मोटे हो जाते है और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते है। ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगाकर अंदर किया जाये तो दर्द नही होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किये जा सकते है।
एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से परम आवश्यक है।

5.7.17

मुंह की लार के स्वास्थ्य लाभ // Health Benefits of Saliva of the Mouth


     सुबह जब हम सो कर उठते है उस समय जो हमारे मुहं की लार होती है उसके अनेक फायदे है इसे बासी मुंह की लार भी कहते है । सुबह की लार का पूरा फायदा उठाने के लिए हमें बिना मुहं धोये ही उसका उपयोग करना चाहिए। यह एक औषधीय गुण है जो आपकी कई समस्याओं को खत्म करता है। आइए जानते है कि इसके क्या-क्या फायदें है।
मुंह में बनने वाली लार हमारी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है इस बारे में हम कभी ध्यान ही नहीं देते लेकिन अगर शरीर में इसकी कमी हो जाए तो मुंह का स्वाद बरकरार रखने से लेकर कई बीमारियों और संक्रमणों का खतरा हो सकता है। जानते हैं लार के फायदे :-
   सोने से पहले दातों को साफ करके सोएँ और फिर सुबह उठकर बिना कुल्ला किये बिना थूके प्रयोग करे। ये मुह की लार हमारे शरीर की सर्वोत्तम अमृत तुल्य औषिधि है। जो केसा भी चश्मा हो उसको उतारने का गुण रखती है केसा भी दाद हो उसको ठीक करने का गन रखती है, लार बाज़ार में नही मिलती यह सभी के मुँह में भगवान ने उपहार स्वरुप दी है। 

 
लार के फायदे
आखों के नीचे काले घेरे के लिए :-
 यदि किसी भाई बहन के आखों के नीचे काले घेरे हो गये हैं तो वो सुबह मे मुह की लार से धीरे धीरे मालिश करें तो ये काले घेरे ठीक हो जायेंगे लेकिन प्रयोग 1-2 महीने करना पड़ेगा।
चस्मा उतारने के लिए :- 
चाहे कितने भी नंबर के मोटे चश्मे लगे हो वे भाई बहन सुबह उठकर पानी का कुल्ला किये बिना जो लार रात भर में इकट्ठी हुई वो आखों में काजल या गुलाब जल की तरह लगानी है | यह आप रात को सोते समय और सुबह 5 बजे उठकर बेड पर लगाये ताकि मुँह 1-2 घंटे बाद धोये तो लार का अपना काम कर सके। कैसा भी चश्मा हो उतरने के 100% आसार रहते है लेकिन आपको प्रयोग तब तक जारी रखना पड़ेगा जब तक आपके चश्मे का नंबर धीरे धीरे कम होकर शून्य हो जाये परिणाम 100% मिलेगा लेकिन कुछ वक़्त लगेगा और लार का कोई साइड इफ़ेक्ट नही है लार से तो आँखों की रौशनी (6/6) भी बढ़ती है।
डायबिटीज के रोगियों के लिए :- 
डायबिटीज के रोगियों को जहाँ चोट लगी है वहां सुबह की लार लगाये घाव भरने लगेगा।
शरीर के जलने पर :-
 जिन लोगों के जलने से शरीर के किसी भी भाग में कोई दाग हो और नही जा रहा हो वे इसी लार की मालिश करें दाग त्वचा के रंग का होने लगेगा।
आंख आना
जब आंख आती है तो काफी दर्द होता है और आंखों से पानी भी आता है। एेसे में अगर आप आंख पर लार लगाएंगी तो 24 घंटो के अंदर आंख सही हो जाती है।
दाद के लिए :-
 जिन लोगों के दाद हो गये हैं वे भी इस लार को प्रतिदिन सुबह उठते ही बिना कुल्ला किये रात भर की इकट्ठी मूंह की लार लगाये दाद देखते ही देखते छूमंतर हो जायेगा। ऐसी कई बीमारी का इलाज है ये मुह की लार |
मुहं की लार में क्या होता है :-
आइये जानते है मुँह की लार में होता क्या है? मुँह की लार में टायलिन नामक एंजाइम होता है जो हमारी पाचन क्रिया को बढाता है और जो लोग खाते हैं या थूकते रहते हैं धीरे धीरे ये लार बनना बंद हो जाती है और मुँह के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इस लार का PH मान 8.3 होता है। और आप ये सभी सुबह जो टूथपेस्ट करते हो वो करना बंद करे क्योकि इससे लार को हम थूक देते हैं।इसके स्थान पर नीम या बबूल की दातुन करे। ये दातुन करने से लार सर्वाधिक लार बनती है और जिससे दातुन किया उस भाग को काट कर निकाल दे और पानी मे भिगोकर रखें अगले दिन फिर उसी दातुन के अगले हिस्से को प्रयोग में ले सकते है।
 
जले हुए दाग मिटाएं
अगर आप सुबह-सुबह उठ के अपना लार जले हुए निशान पर लगाएंगे तो ऐसा करने से कुछ समय में दाग मिटने लगेगा।
पेट के लिए लाभदायक
जब आप सुबह पानी पीते है तो रात भर जो मुंह में जमा लार होता है वो पानी के साथ मुंह में चला जाता है जो पेट के लिए बड़ा ही फायदेमंद है।
नेत्र रोग मे - 
आजकल बच्‍चों तक को चश्‍मा लगना आम बात है। इस चश्‍में को उतारने में भी सुबह की बिना मुहं धोये की लार यदि आखों में काजल की तरह लगाया जाये तो चश्‍में कुछ ही महीने में उतर सकता है। बच्‍चों के चश्‍में चार से छ:माह में ही उतर जाते है बडों काे थोडा लम्‍बा टाइम लगभग एक साल भी लग सकता है।
    इस प्रकार सुबह की अथवा बासी मुहं की लार से हम मुफत में कई बीमारियों का इलाज कर सकते है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि इस लार में वो सभी 18 तत्‍व पाये जाते है जो कि मिटटी में पाए जाते है

4.7.17

सोयाबीन खाने के फायदे//benefits of eating soya bean



   सोयाबीन में अधिक मात्रा में प्रोटीन होने के कारण इसका पोषक मान बहुत अधिक होता है। प्रोटीन के साथ-साथ इसमें विटामिन और खनिज तथा विटामिन ‘बी’ काॅमप्लेक्स और विटामिन ‘ई ’ काफी अधिक मात्रा में होता है, जो शरीर निर्माण के लिए आवश्यक एमिनो ऐसिड प्रदान करते है।यह प्रोटीन का उच्‍च स्रोत तो होता ही है साथ ही फाइबर और कैल्शियम भी इसमें पर्याप्‍त मात्रा में पाये जाते हैं। सोया खाने में भी स्‍वादिष्‍ट होता है और विशेषकर बच्‍चों को यह काफी पसंद आता है।
     सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोंस से भरपूर आहार का सेवन रजोनिवृत्त महिलाओं में हड्डियों को कमजोर होने और हड्डियों के क्षरण से संबंधित बिमारी ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा सकता है. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है. इंग्लैंड के हुल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, सोयाबीन खाद्य उत्पादों में आइसोफ्लेवोंस नामक रसायन होता है जो कि संरचना में इस्ट्रोजन हार्मोन जैसा होता है और महिलाओं को ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचा सकता है.
उबले हुए सोयाबीन और टोफू कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत हैं, लेकिन सोया मिल्क से प्राप्त होने वाली कैल्शियम की मात्रा उस ब्रांड पर निर्भर करती है जो आप खरीदती हैं। जैसा कि आप जानती ही हैं कि सोया एक सर्वोत्तम उपयोगी आहार है, लेकिन हम सभी इसके इस्तेमाल के बेहतर तरीकों से भी पर्याप्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
 
सोयाबीन द्वारा विभिन्न रोगों में उपचार
‪दिल‬ के रोग में :
   इस में 20 से 22 प्रतिशत वसा पाई जाती है। सोयाबीन की वसा में लगभग 85 प्रतिशत असन्तृप्त वसीय अम्ल होते हैं, जो दिल के रोगियों के लिए फायदेमंद है। इसमें ‘लेसीथिन’ नामक प्रदार्थ होता है। जो दिल की नलियों के लिए आवश्यक है। यह कोलेस्ट्रांल को दिल की नलियों में जमने से रोकता है।
यह खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह दिल के रोगियों के लिये फायदेमंद है। ज्यादातर दिल के रोगों में खून में कुछ प्रकार की वसा बढ़ जाती है, जैसे-ट्रायग्लिसरॉइड्स, कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल, जबकि फायदेमंद वसा यानी एचडीएल कम हो जाती है। सोयाबीन में वसा की बनावट ऐसी है कि उसमें 15 प्रतिशत सन्तृप्त वसा, 25 प्रतिशत मोनो सन्तृप्त वसा और 60 प्रतिशत पॉली असन्तृप्त वसा है। खासकर 2 वसा अम्ल, जो सोयाबीन में पायें जाते हैं। यह दिल के लिए काफी उपयोगी होते हैं। सोयाबीन का प्रोटीन कोलेस्ट्रल एवं एलडीएल कम रखने में सहायक है। साथ ही साथ शरीर में लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल एचडीएल भी बढ़ाता है|
‪‎मानसिक‬ रोगों में :
   सोयाबीन में फॉस्फोरस इतनी होती है कि यह मस्तिष्क (दिमाग) तथा ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी, जैसे-मिर्गी, हिस्टीरिया, याददाश्त की कमजोरी, सूखा रोग (रिकेट्स) और फेफड़ो से सम्बन्धी बीमारियों में उत्तम पथ्य का काम करता है। सोयाबीन के आटे में लेसीथिन नमक एक पदार्थ तपेदिक और ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी में बहुत लाभ पहुंचता है। भारत में जो लोग गरीब है। या जो लोग मछली आदि नही खा सकते है, उनके लिए यह मुख्य फास्फोरस प्रदाता खाद्य पदार्थ है। इसको खाना गरीबों के लिए सन्तुलित भोजन होता है
‪उच्चरक्तचाप‬ :
   रोज कम नमक में भुने आधा कप इस का 8 हफ्तों तक सेवन करने से ब्लड़प्रेशर काबू मे रहता है। इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कालीमिर्च भी डालकर सकते हैं। सिर्फ आधा कप रोस्टेड सोयाबीन खाने से महिलाओं का बढ़ा हुआ ब्लडप्रेशर कम होने लगता है। लगातार 8 हफ्ते तक सोयाबीन खाने से महिलाओं का 10 प्रतिशत सिस्टोलिक प्रेशर, 7 प्रतिशत डायस्टोलिक और सामान्य महिलाओं का 3 प्रतिशत ब्लडप्रेशर कम हो जाता है। तो आप भी सोयाबीन को 8 से 12 घण्टे पानी में भिगोकर रख दें और सुबह ही गर्म कर के खायें।
‪पेट‬ में कीड़े :
इस की छाछ पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
‪मधुमेह‬ (डायबिटीज) :
सोयाबीन मोटे भारी-भरकम शरीर वालों के तथा मधुमेह (डायबिटीज) वाले लोगों के लिए उत्तम पथ्य है। सोया आटे की रोटी उत्तम आहार है।
‪‎आमवात‬ या गठिया :
सोया आटे की रोटी खाने तथा दूध पीने से गठिया (जोड़ों का दर्द) रोग दूर होता है।
दूध‬ को बढ़ाने के लिए :
दूध पिलाने वाली स्त्री यदि सोया दूध (सोयाबीन का दूध) पीये तो बच्चे को पिलाने के लिए उसके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है।
‪‎  
मूत्ररोग‬ :
इस का रोजाना सेवन करने से मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी का मूत्ररोग (बार-बार पेशाब के आने का रोग) ठीक हो जाता है।
प्रोस्टेट कैंसर रोकने में सहायक
सोयाबीन अथवा सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों में आइसोफ्लेवोन नामक फाइटोरसायन उपस्थित होते हैं। इन रसायनों के विभिन्न महत्व पाए गए हैं। वे शरीर में कैंसर के प्रतिरोधक का कार्य भी करते हैं, खासतौर पर स्तन व प्रोस्ट्रेट कैंसर में। महिलाओं में 45 से 50 वर्ष की आयु के पश्चात रजोनिवृत्ति (मोनीपॉज) की समस्या प्रारंभ हो जाती है। जिसके लक्षण हैं एक दम से रात में पसीना आना, चिड़चिड़ापन होना, मुँह का लाल व गर्म हो जाना इत्यादि। पचास ग्राम सोयाबीन प्रतिदिन के हिसाब से उपयोग में लाने पर महिलाएँ इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
एनिमिया में लाभकारी
सोयाबीन में कैल्शियम व लोहा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण यह महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है। गाय व भैंस के दूध में लोहा ना के बराबर पाया जाता है। सोयाबीन का सेवन उन महिलाओं के लिए बहुत अच्छा है, जो कि एनिमिया (हीमोग्लोबिन की कमी) या ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी कमजोर होना) नामक बीमारियों से पीड़ित होती हैं।
‪प्रोटीन‬ के लिए :
प्रोटीन शरीर के विकास के लिए आवश्यक है। त्वचा, मांसपेशियां, नाखून, बाल वगैरह की रचना प्रोटीन से होती है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क (दिमाग), दिल, फेफड़े आदि मनुष्य शरीर के आंतरिक अंगों की रचना में प्रोटीन के स्रोत सोयाबीन, अंकुरित गेहूं, बिनौल का आटा, चना, मसूर, मटर, सेम तथा विभिन्न प्रकार की दालें, मूंगफली इत्यादि में है।

हड्डी‬ के कमजोर होने पर :
सोयाबीन हडि्डयों से सम्बन्धित रोग जैसे हडि्डयों में कमजोरी को दूर करता है। इस को अपनाकर हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। अस्थिक्षारता एक ऐसा रोग है जिसमें हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं और उसमें फैक्चर हो जाता है। हडि्डयो में कैल्श्यिम की मात्रा कम हो जाती है
और भी फायदे हैं सोयाबीन के -
दिन में एक बार सोयाबीन के आटे से बनी चपाती खाने से पेट साफ रहता है और एसिडिटी दूर हो जाती है।
2. सोयाबीन परिवार के लिए एक उत्तम आहार है। खासतौर पर बढ़ते हुए बच्चों के लिए, बूढ़े व्यक्तियों, मधुमेह तथा दिल के रोगियों और मोटापा घटाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
3. कमजोरी होने पर अंकुरित सोयाबीन चबाने और उसके साथ सोयाबीन से बना आहार खाने से कमजोरी दूर हो जाती है।
4. सोयाबीन शरीर का विकास करने वाले प्रोटीनों एवं कुदरती खनिज पदार्थो से भरपूर है।
5. डायबिटीज के रोगियों के लिए सोयाबीन के आटे का उपयोग फायदेमंद होता है।
6. जो माताएं बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं उन्हें सोयाबीन का सेवन खूब करना चाहिए।
7. सोयाबीन का सेवन करते रहने से एक्जिमा रोग नहीं होता। साथ ही चेहरे पर कील-मुंहासे, दाग-धब्बे नहीं होते।
8. सोयाबीन के आटे से बना हलुवा प्रतिदिन खाने से दिमागी शक्ति बढ़ती है।

26.6.17

फेफड़े को तंदुरुस्त रखने के योग आसन:Yoga posture of keeping lungs fit



    अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए आपको धूम्रपान से दूर रहना चाहिए ये तो आपको मालूम ही होगा। लेकिन इसके अलावा आप अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए योग का सहारा भी ले सकते हैं। योग आपकी छाती की मांसपेशियों को मज़बूत करता है, आपके फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है और साथ ही, आप बेहतर तरीके से ऑक्सीजन ले सकते हैं। सेलेब्रिटी योग एक्सपर्ट सुनैना रेखी कुछ ऐसे योग के आसन बता रही हैं जिनके लगातार अभ्यास से आप अपने फेफड़ों का स्वास्थ्य बेहतर बना सकते हैं।
मत्स्यासन
मत्स्यासन शरीर में रक्त के संचरण में मदद करता है जिससे सभी अंगों तक रक्त पहुं पाता है। यह गहरी सांस लेने के लिए प्रेरित करता है जिसकी वजह से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। इस आसन को करने से सांस के सभी रोगों में फायदा होता है।
विधि
• पेट के बल सीधा लेट जाएं।
• पैर सीधे रखें और हाथ बगल में सीधे फैला लें।
 
• एक-एक करके दोनों तरफ के कूल्हे को उठाकर हाथ उनके नीचे रख लें।
• सांस बाहर छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं।
• अपनी छाती को ऊपर उठाएं और गर्दन को पीछे की तरफ मोड़ दें।
• कुछ सेकेंड्स के लिए इसी मुद्रा में रहें, फिर वापस आराम से लेट जाएं।
योग मुद्रा
योग की इस मुद्रा से रक्त का प्रवाह फेफड़ों की तरफ होता है जिससे फेफड़ों की कोशिकाओं से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। इस आसन से आपको शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाने व ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है।
• अपनी दाएं हाथ की कलाई बाएं हाथ से पीछे ले जाकर पकड़ें।
• अंदर सांस लें, कंधों को खींचकर पीछे की और रखें और छाती को बाहर की ओर ले जाएं।
• अब सांस बाहर निकालते हुए आगे की तरफ झुकें। अपने माथे को दाएं घुटने से छुएं।
• अब सांस अंदर लेते हुए शुरुआती मुद्रा में आ जाएं।
• इस मुद्रा को फिर से बाएं घुटने के साथ करें।

नाड़ी शोधन प्राणायाम

इस गहन श्वसन तकनीक का आपके श्वसन प्रणाली में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि इस आसन का अभ्यास करने से अस्थमा के मरीजों को काफी आराम हुआ है।
• रीढ़ की हड्डी और कंधों को सीधा करके बैठें। रखें। गर्दन सीधी और ठोड़ी थोड़ी नीचे झुकी हुई हो। आंखें बंद रखें।
• अब सीधे हाथ की दोनों पहली उंगलियां ललाट पर रखें। गहरी श्वास लेकर अपनी सांसों को सामान्य करें। अपने अंगूठे को दायीं नासिका पर और अंतिम दोनों उंगलियों को बायीं नासिका पर रखें।


• दायीं नासिका को अंगूठे से बंद करके बायीं नासिका से श्वास को अंदर लें। इसके बाद बायीं नासिका को भी बंद करें।
• इस अवस्था को आंतरिक कुंभक कहा जाता है, ऐसा कुछ ही क्षण करें। फिर दायीं नासिका से अंगूठे को हटा कर श्वास को धीमे-धीमे बाहर निकालें, इस समय बायीं नासिका बंद हो।
• अपना ध्यान श्वास पर ही रखें। इसी प्रक्रिया को अब उल्टा करें। बायीं नासिका को बंद करके दायीं से श्वास भरें ओर बायीं निकालें। इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम का एक पूरा राउंड कहा जाता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
यह आसन विशेष रूप से आपके फेफड़ों की सांस लेने और ऑक्सिजन को अधिक समय तक रोकने की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह रीढ़ को आराम देता है और पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है।
विधि
• पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं, रीढ़ तनी हो और दोनों पैर एक-दूसरे से लगे हों।
• अपने बाएँ पैर को मोड़ें और उसकी एड़ी को पुष्टिका के दाएं हिस्से की और ले जाएं।


• अब दाएं पैर को बाएँ पैर की ओर लाएं और बायाँ हाथ दाएं घुटनों पर और दायाँ हाथ पीछे ले जाएं।
• कमर, कन्धों और गर्दन को इस क्रम में दाईं और मोड़ें।
• लम्बी साँसे लें और छोड़ें।
• शुरुआती मुद्रा में आने के लिए सांस छोड़ना जारी रखें, पहले पीछे स्थित दाएं हाथ को यथावत लाएं, फिर कमर सीधी करें, फिर छाती और अंत में गर्दन।
• अब इसी प्रक्रिया को दूसरी दिशा में करें।
पद्म सर्वांगासन
पद्म सर्वांगासन आपके रक्त को शुद्ध करता है और आपके फेफड़ों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भेजता है। इस आसन को करते हुए आपको सांस लेने की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
विधि
• सलंब सर्वांगासन से शुरुआत करें।
• जब आप सांस बाहर छोड़ें, घुटने मोड़ लें और वो भी इस प्रकार की आपकी दाहिनी एड़ी बायीं जांघ पर और बाई एड़ी दाहिनी जांघ पर हो।
• सांस अंदर लें और अब पैरों को छत की तरफ फैलाएं। कोशिश करें कि कूल्हे आगे की तरफ हों और घुटने एक दूसरे के करीब।
• कुछ देर इसी मुद्रा में रहें फिर पैर खोल लें और धीरे धीरे शरीर को नीचे की तरफ ले आएं।

24.6.17

भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि और लाभ

    

भस्त्रिका प्राणायाम भस्त्र शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है ‘धौंकनी’। वास्तविक तौर पर यह प्राणायाम एक भस्त्र या धौंकनी की तरह कार्य करता है। धौंकनी के जोड़े की तरह ही यह ताप को हवा देता है, भौतिक औऱ सूक्ष्म शरीर को गर्म करता है। जहाँ तक बात रही भस्त्रिका प्राणायाम की परिभाषा की तो यह एक ऐसी प्राणायाम है जिसमें लगातार तेजी से बलपूर्वक श्वास लिया और छोड़ा जाता है। जैसे लोहार धौंकनी को लगातार तेजी से चलाता है, उसी तरह लगातार तेजी से बलपूर्वक श्वास ली और छोड़ी जाती है। योग ग्रन्थ हठप्रदीपिका में इस प्राणायाम को विस्तार से समझाया गया है (2/59-65)। दूसरी योग ग्रन्थ घेरंडसंहिता में इसको इस प्रकार व्याख्या किया गया है।

भस्त्रैव लौहकाराणां यथा क्रमेण सम्भ्रमेत्।
तथा वायुं च नासाभ्यामुभाभ्यां चालयेच्छनैः।। – घें. सं. 5/75


इस श्लोक का मतलब होता है जिस तरह लोहार की धौंकनी लगातार फुलती और पिचकती रहती है, उसी तरह दोनों नासिकाओं से धीरे-धीरे वायु अंदर लीजिए और पेट को फैलाइए, उसके बाद गर्जना के साथ इसे तेजी से बाहर फेंकिए।
भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि-
अब बात आती है कि भस्त्रिका प्राणायाम कैसे किया जाए। यहां पर इसको सरल तौर पर समझाया गया है जिसके मदद से आप इसको आसानी से कर सकते है।
सबसे पहले आप पद्मासन में बैठ जाए। अगर पद्मासन में न बैठ पाये तो किसी आराम अवस्था में बैठें लेकिन ध्यान रहे आपकी शरीर, गर्दन और सिर सीधा हो।
शुरू शुरू में धीरे धीरे सांस लें।
और इस सांस को बलपूर्वक छोड़े।
अब बलपूर्वक सांस लें और बलपूर्वक सांस छोड़े।
 
यह क्रिया लोहार की धौंकनी की तरह फुलाते और पिचकाते हुए होना चाहिए।
इस तरह से तेजी के साथ 10 बार बलपूर्वक श्वास लें और छोड़ें।
इस अभ्यास के दौरान आपकी ध्वनि साँप की हिसिंग की तरह होनी चाहिए।
10 बार श्वसन के पश्चात, अंत में श्वास छोड़ने के बाद यथासंभव गहरा श्वास लें। श्वास को रोककर (कुंभक) करें।
फिर उसे धीरे-धीरे श्वास को छोड़े।
इस गहरे श्वास छोड़ने के बाद भस्त्रिका प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ।
इस तरह से आप 10 चक्र करें।
भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ
पेट की चर्बी कम करने के लिए:
 भस्त्रिका प्राणायाम ही एक ऐसी प्राणायाम है जो पेट की चर्बी को कम करने के लिए प्रभावी है। लेकिन इसकी प्रैक्टिस लगातार जरूरी है।
वजन घटाने के लिए: 
यही एक ऐसी प्राणायाम है जो आपके वजन कम कर सकता है। लेकिन पेट की चर्बी एवम वजन कम करने के लिए यह तब प्रभावी है जब इसको प्रतिदिन 10 से 15 मिनट तक किया जाए।
अस्थमा के लिए: 
भस्त्रिका प्राणायाम अस्थमा रोगियों के लिए बहुत ही उम्दा योगाभ्यास है। कहा जाता है की नियमित रूप से इस प्राणायाम का अभ्यास करने से अस्थमा कम ही नहीं होगा बल्कि हमेशा हमेशा के लिए इसका उन्मूलन हो जायेगा।
गले की सूजन: 
इस योग के अभ्यास से गले की सूजन में बहुत राहत मिलती है।
बलगम से  निजात: 
यह जठरानल को बढ़ाता है, बलगम को खत्म करता है, नाक और सीने की बीमारियों को दूर करता है।
भूख बढ़ाने के लिए: 
इसके प्रैक्टिस से भूख बढ़ाता है।
शरीर को गर्मी देता है :
 हठप्रदीपिका 2/65 के अनुसार वायु, पित्त और बलगम की अधिकता से होनी वाली बीमारियों को दूर करता है और शरीर को गर्मी प्रदान करता है।
नाड़ी प्रवाह के लिए उत्तम: 
यह प्राणायाम नाड़ी प्रवाह को शुद्ध करता है। सभी कुंभकों में भस्त्रिका कुंभक सबसे लाभकारी होता है।
कुंडलिनी जागरण में सहायक: 
यह तीन ग्रंथियों ब्रह्मग्रंथि, विष्णुग्रंथि और रुद्रग्रंथि को तोड़ने के लिए प्राण को सक्षम बनाता है। ये ग्रंथियां सुसुम्ना में होती हैं। ये तेजी से कुंडलिनी जागृत करती हैं। (हठप्रदीपिका 2/66-67)
श्वास समस्या दूर करना: 
यह श्वास से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए सबसे अच्छा प्राणायाम है।
भस्त्रिका प्राणायाम के सावधानियां
भस्त्रिका प्राणायाम उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को नहीं करनी चाहिए।
हृदय रोग, सिर चकराना, मस्तिष्क ट्यूमर, मोतियाबिंद, आंत या पेट के अल्सर या पेचिश के मरीजों के ये प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
गर्मियों में इसके बाद सितली या सितकारी प्राणायाम करना चाहिए, ताकि शरीर ज्यादा गर्म ना हो जाए।

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने की विधि और फायदे



अनुलोम विलोम एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम है| इस प्राणायाम में सांस लेने की क्रिया को बार बार किया जाता है| अनुलोम का मतलब होता है सीधा और विलोम का मतलब होता है उल्टा। इस प्राणायाम याने की अनुलोम विलोम में नाक के दाएं छिद्र से सांस को खींचते हैं, और बायीं नाक के छिद्र से सांस को बाहर निकालते है।
अनुलोम विलोम प्राणायम को नाड़ी शोधक प्राणायम के नाम से भी जान जाता है| इस आसान को करने के लिए उम्र का बंधन नहीं है, हर उम्र के व्यक्ति इसका लाभ उठा सकते है| इसे नियमित रूप से करने पर शरीर की सारी नाडि़यां शुद्ध व निरोग रहती हैं। इसके अलावा इस आसान को करने से सर्दी, जुकाम व दमा में भी काफी राहत मिलती है|
अनुलोम विलोम प्राणायाम करने की विधि
अनुलोम विलोम प्राणायम को करने के लिए किसी भी स्तिथि जैसे सुखासन, सिद्धासन या फिर वज्रासन में बैठें।
 
अनुलोम विलोम आसन की शुरुवात हमेशा नाक के बाये छिद्र से करनी है|
 
सबसे पहले हाथो की उंगलियो की सहायता से नाक का दाया छिद्र बंद करें व बाये छिद्र से लंबी सांस लें|
इसके पश्चात बाये छिद्र को बंद करके, दाये वाले छिद्र से लम्बी सांस को छोड़े|
इस प्रक्रिया को कम से कम 10-15 मिनट तक दोहराइए|
सांस लेते समय आपको अपना ध्यान दोनो आँखो के बीच मे स्थित आज्ञा चक्र पर एकत्रित करना होता है|
बस लम्बी लम्बी साँसे लेते जाइये और मन में ओम मंत्र का जाप करते जाइये|
शुरुवात में इसे योग प्रशिक्षक के निर्देश में किया जाए तो बेहतर है।
यदि आप एनीमिया से पीड़ित है तो इसे करने से पहले चिकित्सक से उचित सलाह ले|
साँस को छोड़ने और लेने का काम सहजता से करे| गलत तरीके से या फिर जल्दी बाजी में इसे करने से उल्टा शरीर को नुकसान होता है|
अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करते वक्त तीन क्रियाएँ की जाती है| पूरक, कुम्भक और रेचक। इसको नियमित रूप से 10 मिनट करने पर भी स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते है|
नियमित तौर पर इस योग को करने से फेफड़े मजबूत बनते हैं।
अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने से एलर्जी और सभी प्रकार की चर्म समस्याए खत्म हो जाती है|
अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से शरीर में रक्त का संचार सुधरता है| यह ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने में सहायक है|
वजन घटाने के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है| इस प्राणायाम को करने से शरीर की चर्बी घटती है और मोटापा भी कम होता है|
 
सर्दियों में शरीर का तापमान कम होने से सर्दी जुखाम जैसी समस्याए होती है, लेकिन यदि इस योग को ठंडी के दिन में किया जाये तो हमारे शरीर का तापमान संतुलित रहता हैं।
इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है| और मधुमेह जैसी समस्याए खत्म हो जाती है|
इसे ब्रेन ट्युमर जैसी समस्याए ठीक हो जाती है और यादास्त (मेमोरी) भी बढ़ती है|
इससे सायनस की समस्या ठीक हो जाती है और टाँन्सीलस की परेशानी में भी आराम मिलता है|
इसे करने से आर्थराटीस, कार्टीलेज घीसना जैसी बीमारियाँ भी ठीक हो जाती है|
वृद्धावस्था में अनुलोम विलोम करने से यह आपको स्वस्थ और निरोग रखने में मदद करता है। इसे करने से गठिया और जोड़ो का दर्द ठीक हो जाता है|
सावधानी-यदि आप कमजोर और एनीमिया से पीड़ित है। तो शुरुवात में सांस लेने और छोड़ने में परेशानी आ सकती है| इसलिए शुरुवात में इस क्रिया को 4 से 5 बार ही रखे|