26.10.17

वीर्य गाढ़ा करने का अनुपम नुस्खा

  

वीर्य ही शारीर का सार है, एक योगी को सबसे ज्यादा दुःख अपने वीर्यपात होने पर ही होता है, मगर आज कल के युवा और आधुनिक डॉक्टर इसकी उतना नहीं आंकते, अत्यधिक मै आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें।
      इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।   मैथुन से या अश्लील सिनेमा और साहित्य से वीर्यपात कर चुके युवा जिनका वीर्य पानी की तरह हो चूका है, उनका जीवन नरक के समान है. वीर्य ही जीवन है, यही व्यक्ति का ओज़ है|,वीर्य को गाढ़ा और शक्तिशाली करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का ये प्रयोग बहुत लाभदायक है.|
वीर्य गाढ़ा करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का प्रयोग.
एक किलो सफ़ेद प्याज का रस निकाल कर रख लीजिये, इसमें 100 ग्राम अजवायन को 12 घंटे तक सफेद प्याज के रस में भिगोएँ जिससे अजवाईन इसको सोख ले, सुबह जब सारा रस अजवायन सोख ले तो इसको छाया में सुखा लें।
सूखने के बाद उसे फिर से इसी तरह  प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें।

15.10.17

मिर्च खाएं, गठिया से निजात पाएं


वैज्ञानिकों की मानें तो तीखी मिर्च गठिया के दर्द से निजात दिला सकती है.
लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मिर्च के तीखेपन से गठिया के दर्द का इलाज संभव हो सकेगा.
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह शोध प्रारंभिक अवस्था में है लेकिन इससे गठिया की दवा तैयार हो सकेगी.
गठिया का रोग बड़ा कष्टप्रद माना जाता है और इसमें शरीर की प्रतिरोधी प्रणाली जोड़ों पर हमला करती है जिसकी वजह से उनमें दर्द, सूजन और कड़ापन आ जाता है.
एक अनुमान के अनुसार विश्वभर में लाखों लोग गठिया से पीड़ित हैं.  

केवल ब्रिटेन में ही छह लाख लोग इससे पीड़ित बताए जाते हैं.
प्रोफेसर सूसन ब्रेन के नेतृत्व में दो साल पहले एक शोध दल का गठन किया गया था.
यह दल इस बात की जाँच कर रहा है कि मिर्च का तीखा तत्व किस तरह गठिया की परेशानी से छुटकारा दिला सकता है.
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे एक नई दर्दनाशक दवा तैयार हो सकेगी. साथ ही इसके दुष्प्रभाव भी नहीं होंगे.
प्रोफेसर सूसन ब्रेन का कहना है कि सदियों से मिर्च में पाया जाना वाला कैपसेसिन कई तरह की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है.
दर्द में आराम दिलानेवाली ऐसी क्रीमें उपलब्ध हैं जिनमें कैपसेसिन होता है. लेकिन अब तक खानेवाली दवा के रूप में इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है.
उनका कहना है कि कई दवा कंपनियों ने उनके इस शोध में दिलचस्पी दिखाई है.

14.10.17

उच्च रक्तचाप को जड़ से खत्म करने के आयुर्वेदिक उपाय



    हाइपरटेन्षन (hypertension) या उच्च रक्तचाप आज के समय के घातक रोगों में से एक है. इसे आयुर्वेद में ‘रक्त गति वात’ भी कहा जाता है. रक्तचाप की दर व्यक्ति की आयु, शारीरिक एवं मानसिक कार्यशीलता, परिवारिक पृष्ठभूमि तथा उसके खानपान पर निर्भर करती है. एक स्वस्थ मनुष्य में रक्तचाप की दर 80 मि.मी. डाइयासटोलिक (diastolic) और 120 मि.मी. सिसटोलिक (systolic) होती है.
उच्च रक्तचाप के कारण-
अनुचित खानपान, अत्यंत गरिष्ठ भोजन का सेवन तथा शारीरिक व्यायाम की कमी उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण हैं. फास्ट फूड, फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले कीटनाशक, प्रिज़र्वेटिव्स, इन सब कारणों से शरीर में जीवविष (toxins) प्रविष्ट होते हैं जो कि पाचन क्रिया पर प्रादुर्भाव डालते है. पाचन क्रिया के मंद पड़ने से भोजन से आम (acidic toxin) उत्पन्न होता है जो रक्त में प्लास्मा से संयुक्त होकर साम (Blood+Toxin) का निर्माण कर देता है. ‘साम’ सामान्य रक्त से अधिक घनिष्ट और भारी होता है जिस कारण ये रक्तवाहिनियों के कमज़ोर हिस्सों में जाकर जम जाता है. इस कारण रक्त धमनियों की चौड़ाई कम हो जाती है और रक्त को स्रोतों (channels- arteries) में वहन करने में अवरोध आता है और इस कारण धमनियों में अधिक दबाव या ‘ब्लड प्रेशर’ का निर्माण हो जाता है. मॉडर्न मेडिकल साइंस अब इस बात को स्वीकार रहा की रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण है चीनी और वेजिटेबल आयिल्स के उपयोग से उत्पन्न धमनियों में जलन और शुष्कता. यह जड़ है इस बीमारी की.
मानसिक तनाव, चिंताग्रस्त रहने से, अधिक सोचने से भी रक्तचाप की दर सामन्य से बढ़ जाती है. बहुत अधिक तला हुआ गरिष्ठ भोजन खाना, चाय-कॉफी का अधिक सेवन, प्रोसेस्ड फूड भी रक्तचाप को बढ़ाने के कारण हैं.
उच्च रक्तचाप के लक्षण -
उच्च रक्तचाप को Silent Killer भी कहा जाता है. इस रोग के लक्षणों की सही पहचान करना अत्यंत आवश्यक है और इसका उपचार आयुर्वेद द्वारा संभव है. गर्दन के पीछे के हिस्से में दर्द (occipital headache), घबराहट और कंपकपी महसूस होना, चक्कर आना और बिना काम किए थकान का रहना, उच्च रक्तचाप के प्रमुख लक्षण है.
आयुर्वेद अनुसार इस रोग की चिकित्सा में प्रमुख कारण का निवारण करना आवश्यक है. उच्च रक्तचाप तीनों दोषों की विकृति, हृदय तथा रक्त धमनियाँ में उत्पन्न विकार से होता है. रक्त धमनियों में वयान वायु की गड़बड़ी के लक्षण पाए जाते हैं. इसलिए उपचार में इन सब लक्षणों पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
उपचार विधि -
आयुर्वेद अनुसार इस रोग की चिकित्सा में प्रमुख कारण का निवारण करना आवश्यक है. उच्च रक्तचाप तीन दोषों की विकृति, हृदय तथा रक्त धमनियाँ सबको प्रभावित करता है. रक्त धमनियों में वयान वायु की गड़बड़ी के लक्षण पाए जाते हैं. पित्त की विकृति भी इस रोग का प्रमुख कारण है. पित्त और वात प्रकृति के व्यक्ति जिनमें इन दोषों के विकृत होने की संभावना बनती है, उन लोगों में उच्च रक्तचाप होने की संभावना दूसरों से अधिक होती है. इस रोग के समूल नाश के लिए चिकित्सक सर्वप्रथम पाचन क्रिया को सुगठित करने की औषधि देते हैं. साथ ही साथ पूर्व में बढ़े हुए जीव विष (toxins) को शरीर से निकालना भी आवश्यक हैंं. मानसिक तनाव को घटाने के लिए, ध्यान, प्राणायाम को करना भी चिकित्सा का अंग है|
जीवनशैली और खानपान संबंधित सुझाव-
माँस, अंडे, नमक, अचार, चाय, कॉफी का प्रयोग निम्न मात्रा में करना चाहिए.
धूम्रपान और शराब का सेवन नही करना चाहिए.
प्रोटीन और वसा युक्त भोजन का सेवन कम-से-कम रखना और सब्जी, फल आदि की मात्रा भोजन में बढ़ाना हितकर है.
लहसुन, अमला, नींबू, चकोतरा, मौसमी, तरबूज़, बिना मलाई का दूध, और कॉटेज चीज़ का प्रयोग करने से रोगी को लाभ मिलता है. भोजन हल्का और सुपाच्य होना चाहिए.
vishकिसी एक विशिष्ट पद्धति द्वारा किए जाने वाला व्यायाम, जैसे कि जॉगिंग (jogging), तैरना या फुर्ती से की गयी नियमित सैर (brisk walking) को भी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए.
अगर संभव हो तो किसी समझदार योग सलाहकार द्वारा सीख कर अधोमुखश्वानसन, उत्तानसन, पश्चिमोत्तासन, हलासन, सेतु-बँध सर्वंगासन, इन सबका अभ्यास करने से विशेष लाभ होता है.
लाभदायक घरेलू औषधियाँ -
3 से 4 लहसुन लौंग, 10-12 तुलसी के पत्ते लेकर इनका रस निकाल लें और एक-चौथाई गिलास गेहूँ के जवारे के रस के साथ मिलकर रोज़ सेवन करें.
1 छोटे चम्मच प्याज़ के रस में बराबर मात्रा में शहद मिलकर एक हफ्ते तक सेवन करें. यदि लाभ मिले तो इस प्रयोग को कुछ और दिन तक जारी रखें.
लस्सी में एक छोटा चम्मच लहसुन का पेस्ट बनाकर दिन में दो बार लें.
10 ग्राम तरबूज के बीजों को भूनकर उन्हें पीस लें. इस पाउडर को 2 कप पानी में 10 से 15 मिनिट तक उबालें. प्राप्त मिक्स्चर को छान कर सेवन करें. यह प्रयोग रोज़ करें.
त्रिफला का रोज़ रात्रि में सेवन और एक चम्मच मेथी दाना रात को भिगो कर रखने के बाद प्रातः काल उसका सेवन करना चाहिए.
उच्च रक्तचाप में लाभकारी औषधियाँ -
सर्पगन्ध  एक ऐसी बूटी है जिसे सदियों से उच्च रक्तचाप के उपचार में प्रयोग किया गया है. रसगंधा नामक औषधि जिसमें शूतशेखर, जटामांसी और सर्पगन्ध प्रयोग होते हैं, इस व्याधि के निराकरण में अत्यंत उपयोगी है.
अर्जुन - शोध द्वारा ये नतीजे पाये गयें हैं कि यह अँग्रेज़ी चिकित्सा में प्रयोग होने वाली Beta-blocker दवाइयाँ की तरह ही अपना कार्य करती है. इसके साथ-साथ यह औषधि, जिगर तथा हृदय की रक्षाकारक भी है.
गोक्शूरा -: यह औषधि भी रोगनिवारक है तथा इसकी कार्यपद्धति ACE Inhibitors के समान है
पंचकर्म चिकित्सा द्वारा उच्च रक्तचाप का उपचार -
निरूह बस्ती चिकित्सा यदि किसी समझदार वैद्य द्वारा करवाई जाए तो इस रोग के उपचार में बहुत लाभ देती है. इसी प्रकार धारा चिकित्सा भी ज़िद्दी रोग के उपचार में लाभदायक है. दुग्ध तथा बाला द्वारा सिद्ध किए हुए तैल को रोगी के मस्तक पर डाल जाता है. इस विधि को चिकित्सक की देखरेख में किया जाना चाहिए और ये चमत्कारिक प्रभाव देती है.
दोष प्रधानता के अनुरूप रोग निवारण -
*यदि वात दोष के प्रादुर्भाव का कारण मुख्य रूप से रोग का कारण है तो चिंता, तनाव , अधिक सोचने, पढ़ने, लिखने से रोग में अभिवृद्धि पाई जाती है.
*इस अवस्था में रोग-निवारण हेतु रोगी के मनोरोग का उपचार प्रमुख रूप से किया जाता है.
वात उपचार: 125 मिलीग्राम सरपगंध और जटामंसी को 2.5 माह तक दिन में तीन बार लेना चाहिए.
*लहसुन का एक लौंग शहद के साथ रोज़ लेने से भी इसमें फायदा मिलता है.
*सारस्वत पाउडर भी इस रोग के उपचार में लाभदायक है.
*अश्वगंधा से बनी हुई औषधि मिश्रण का सेवन करना चाहिए.
*पित्त की विकृति द्वार उत्पन्न रोग में रोगी को अधिक क्रोध आता है, चिड़चिड़ापन, नकसीर फूटना, भयंकर सरदर्द, आँखों का चौधियाना,  आदि लक्षण मिलते हैं|
*पित्त को शांत करने वाले औषधियों का सेवन करने से इस अवस्था में राहत मिलती है. 250 मिलीग्राम ब्राहमी का सेवन रोज़ रात्रि मेी करना चाहिए.
*इसके अलावा ब्राहमी रसायन या सारस्वत पाउडर का प्रयोग भी लाभप्रद है.
*सर्वा (Indian sarsaparilla) का 15 दिन तक सेवन भी पित्त को शांत करता है.
*कफ की प्रधानता से उत्पन्न होने वाले रोग में व्यक्ति को हल्का सरदर्द, आलस्य, प्रमाद, हाथ-पाँव का फूलना उच्च रक्तचाप के साथ पाए जाते हैं.
chitr*इस अवस्था में रोग के निराकरण के लिए 1 ग्राम गुग्गुलु अथवा अर्जुन का दिन में दो बार सेवन करना चाहिए.
250 ग्राम शिलाजीत दिन में तीन माह के लिए दिन में तीन बार लाभप्रद है.
*रक्त धमनियों को साफ़ करने के लिए 1 ग्राम त्रिफला गुग्गूल का 3 महीने के लिए उपयोग फ़ायदेमंद है.
इस अवस्था में यदि 100 मिलीग्राम इलायची और दालचीनी का प्रयोग दिन में 3 बार 3 महीने तक किया तो लाभदायक सिद्ध होता है.
मंत्र शक्ति मे विश्वास रखने वाले व्यक्ति  निम्न मंत्र के प्रयोग  से लाभान्वित हो सकते हैं-
प्रसन्‍न मंत्र का प्रयोग ब्‍लड प्रेशर को दूर करने के लिए किया जाता है. इस मंत्र को उत्तर की ओर मुख करके 7 दिन तक जाप करने से लाभ मिलता है.
मंत्र यह  है: -
प्रसन्‍नवदनं ध्‍यायेत् सर्वविघ्‍नोपशान्‍तये

13.10.17

पित्त दोष वृद्धि के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार



जब शरीर में अग्नि तत्व की अधिकता हो जाए ; तो इसे पित्त दोष कहते है।
कारण व लक्षण :
– पित्त यानी गर्मी बढ़ने से जिस तरह दूध कुनकुना रहने से उसमे जीवाणु तेज़ गति से बढ़ते है और दही तुरंत जम जाता है ; वैसे ही शरीर में भी कीटाणु तेज़ी से पनपते है। इससे किसी भी तरह का इन्फेक्शन होने की पूरी संभावना होती है। अगर पित्त संतुलित हो तो शरीर किसी भी इन्फेक्शन से लड़कर ख़त्म कर देता है।
– गर्मी ज़्यादा होती है , पसीना अधिक आयेगा , चेहरा लाल या पीला दिख सकता है . दांत पीले रहेंगे और जल्दी सड़ने की संभावना रहेगी।
– पित्त बढ़ा हुआ हो तो नाड़ी देखते समय बीच वाली ऊँगली में स्पंदन अधिक महसूस होता है।यह ऐसा लगता है मानो मेंढक उछल रहा हो।
– गर्मी अधिक होने से सभी धातु पिघल कर बहेंगे। इससे बहता हुआ ज़ुकाम , अत्याधिक कफ वाली खांसी होने की संभावना होगी। श्वेत प्रदर , रक्त प्रदर आदि होने की संभावना रहेगी।
– गर्मी अधिक होने से मुंह में दुर्गन्ध आ सकती है , पसीने में भी दुर्गन्ध आ सकती है। पित्त संतुलित हो तो कितना भी पसीना आये उसमे कोई गंध नहीं होगी।
– गर्मी अधिक होने से ज़रूरी अंग जैसे किडनी खराब हो सकती है , हार्ट एन्लार्ज हो सकता है, बाल सफ़ेद हो सकते है।

– पिम्पल्स , फोड़े फुंसी आदि होने की संभावना बढ़ जाती है।
– सर दर्द , माइग्रेन आदि हो सकता है।
– पेट जल्दी जल्दी खराब होता है।
– क्रोध ,चिडचिडापन अधिक रहेगा।
– गुस्से से ,काम भावना से , ईर्ष्या की भावना से पित्त बढ़ता है।
– खान पान जैसे तिल , दाना , सुखा मेवा , मिर्च-मसाले , तैलीय पदार्थ , गाजर , ऊष्ण के खाद्य पदार्थों आदि के सेवन से पित्त बढ़ता है।
आयुर्वेदिक घरेलु उपचारों के बारे में लिखते हैं जो पित्त दोष से हमें राहत प्रदान करते है |
विभिन्न औषधियों से उपचार-
1॰ आकाशबेल (अमरबेल) : आकाशबेल का रस आधा से 1 चम्मच सुबह-शाम खाने से कब्ज और यकृत (लीवर) के सारे दोष दूर होते हैं साथ ही पित्त की वृद्धि को भी रोकता है और जलन भी दूर करता है।
2. गुरड़ी साग : गुरड़ी को साग के रूप में खाने से पित्त का विरेचन यानी दस्त के द्वारा बाहर निकल जाती है और पित्त के बढ़ने से होने वाले दोष मिट जाते हैं।
3. लज्जालु (छुईमुई) : लज्जालु (छुईमुई) का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम पीने  से पित्त के बढ़ने से होने वाले सभी रोग दूर होते हैं।
 
4. छोटी दुद्धी : पित्त की वृद्धि होने पर उसे निकालने के लिए छोटी दूद्धी का रस 10 से 20 बूंद सुबह-शाम दूध में मिलाकर खाने से पित्त दस्त के साथ बाहर निकल जाता है।
5. सनाय की पत्ती : पित्त के बढ़ने से जलन का कष्ट ज्यादा होता है ऐसे में सनाय की पत्ती का चूर्ण 0.60 से 1.80 ग्राम को लौंग और मुलेठी के साथ पित्त के विरेचन के लिए सेवन करते रहें। जिससे पित्त निकल जाती है।
6. हरीतकी : हरीतकी का चूर्ण सुबह-शाम चीनी के साथ खाने से पित्त की वृद्धि खत्म होती है और जलन भी शान्त होती है।
7. कुटकी : शरीर में पित्त के साथ जलन, बुखार हो तो कुटकी का चूर्ण 0.60 ग्राम से 1.20 ग्राम और पुराना पित्त बुखार हो तो 3 से 4 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह शाम चाटने से पित्त के बढ़ने की बीमारी में फायदा होगा।
8. पटुआ : पित्त की वृद्धि में पटुआ के फूलों का रस 10 मिलीलीटर में कालीमिर्च और मिश्री मिलाकर रोज पीने से शौच साफ आता है और पित्त(Pitt) की वृद्धि भी समाप्त हो जाती है। इसके पत्ते भी विरेचन (दस्त लाने वाले) गुणों से भरे होते हैं।
9. छोटी इलायची : छोटी इलायची 0.60 ग्राम सुबह-शाम देने से पित्त में फायदा होता है।
10 . छरीला : अगर पित्त ज्यादा बढ़ जाता है तो छरीला की फांट, जीरा और मिश्री बराबर मिलाकर 20 मिलीलीटर सुबह-शाम लेने से लाभ हो जाता है।
11. सेंवार : सेंवार के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से पित्त की वृद्धि शान्त होती है और जलन भी दूर होती है।
12. गुड़हल : पित्त के बढ़ने पर और इससे पैदा होने वाले किसी भी तरह के उपद्रव, सिर दर्द, उल्टी, मिचली या जलन आदि में गुड़हुल की 10 से 12 कलियां या फूलों को घोंटकर पिलाने से लाभ होता है।
13. सफेद गुड़हल : सफेद गुड़हल के पत्तों के रस में शक्कर डालकर पीने से बढ़ी हुई पित्त में लाभ मिलता है।
14. बरना : पित्त के ज्यादा होने पर फूलों को पीसकर, घोंटकर रोज सुबह-शाम पीने से या काढ़ा बनाकर 50 से 100 मिलीलीटर पीने से पित्त दस्त के साथ बाहर निकल जाती है।
15. सागोन (सागवान) : सागोन के पेड़ की छाल का चूर्ण 3 से 12 ग्राम सुबह-शाम खाने से पित्त खत्म होती है
16. गिलोय : गिलोय का रस 7 से 10 मिलीलीटर रोज 3 बार शहद में मिलाकर खाने से लाभ होता है।17. अमरा : पित्त के बढ़ने पर अमरा के फल का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से पित्त(Pitt) खत्म होती है।
18 . केला : पित्त के बढ़ने पर या पित्त से सम्बंधित बीमारी में केले के पेड़ का रस 20 से 40 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।
19. झड़बेर : झड़बेर के फल का शर्बत शीतल और पित्तनाशक होता है।
20. फालसे : फालसे के फल का शर्बत सुबह-शाम सेवन करने से पित्त का शमन होता है और पित्त (Pitt)से भरे जलन से मुक्ति मिल जाती है।
21. मुनक्का : पित्त के बढ़ने पर मुनक्का खाना फायदेमन्द होता है। इससे पित्त से भरी जलन भी दूर होती है
7. सफेद पाढ़ल (घंटा पाढर) : सफेद पाढ़ल के फूलों का रस 10 मिलीलीटर से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम लेने से पाचन क्रिया ठीक हो जाती है और खराब पित्त शरीर से बाहर निकल जाती है।
22. दमन पापड़ा : अगर पित्त बढ़ जाता है, उल्टी, जलन, भ्रम, चक्कर, प्यास, बुखार कुछ भी हो तो दमन पापड़ा या पित्त पापड़ा का काढ़ा 50 ग्राम सुबह-शाम लेने से फायदा होता है
23. वेदमुश्क की छाल : वेदमुश्क की छाल का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से शरीर की जलन और पित्त भी शान्त होती है।
24. हरी दूब : पित्त के बढ़ने पर हरी दूब का रस 10 मिलीलीटर सुबह-शाम मिश्री के साथ देने से फायदा होता है। पित्त के बढ़ने पर हरी दूब के अलावा अगर सफेद दूब का उपयोग किया जाये तो ज्यादा फायदा होता है।
25. कागजी नींबू : कागजी नींबू का शर्बत सुबह-शाम पीने से पित्त की वृद्धि बन्द हो जाती है।
26. कोकम : कोकम के पके फल का शर्बत सुबह-शाम पीने से पित्त शान्त हो जाती है।27. चना : 100 ग्राम चने के बेसन से बने मोतिया लड्डुओं के साथ दस पिसी कालीमिर्च मिलाकर खाने से पित्त की गर्मी में लाभ मिलता है।
28. दरियाई नारियल : पित्त के बढ़ने पर दरियाई नारियल के बीच का हिस्सा 0.48 मिलीग्राम से लेकर 1 ग्राम तक को गुलाबजल में घिसकर सुबह-शाम खाने से पित्त शान्त होती है और लाभ होता है।
29. गुलबनफ्शा : गुलबनफ्शा के फूलों की फांट या घोल 40 से 80 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से पित्त शान्त होती है।
30. सालव मिश्री का फल : पित्त को शान्त करने के लिए सालव मिश्री के फल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।
31. कागजी नींबू : पित्तशमन के लिए नींबू के रस और नमक का सेवन करना चाहिए।
32. इमली :
* जलन और पित्त के रोग को मिटाने के लिए इमली के कोमल पत्तों और फूलों की सब्जी बनाकर खानी चाहिए।
* मिश्री के साथ इमली का शर्बत ब-नाकर पीने से हृदय की दाह (सीने की जलन) दूर होती है।
* 10 ग्राम इमली और 25 ग्राम छुहारों को 1 लीटर दूध में उबालें। फिर इसे छानकर पीने से ज्वर की दाह (बुखार की जलन) और घबराहट शान्त होती है।
* वमन (उल्टी) और गर्मी का बुखार होने पर इमली का शर्बत बनाकर पीना चाहिए।
कैथ  पित्त शमन के लिए कैथ के गूदे को शक्कर के साथ खाना चाहिए।
पवांड़ : 2 से 4 ग्राम पवांड़ की जड़ के बारीक चूर्ण को घी में मिलाकर खाने से शीत-पित्त का रोग मिट जाता है।
34. लीची : लीची खाने से पित्त की अधिकता कम होती है।
35. पलास : पलास के गोंद को पानी में गलाकर प्रतिदिन लेप करने से पित्तशोथ मिट जाती है।
36. तुलसी : चौथाई चम्मच तुलसी के बीज एक आंवले के मुरब्बे पर डालकर प्रतिदिन दो बार खाएं। इससे पित्ती ठीक हो जाती है।
 
37. सांवा : पित्त के बढ़ने पर सांवा के पांचों भागों को मिलाकर बने काढ़े को 40 से 80 मिलीलीटर सुबह-शाम खाने से पित्त शान्त होती है।
38. तीनि (तीनि एक तरह की घास है, जो पानी में पायी जाती है) : पित्त के बढ़ने पर तीनि के चावल को उबालकर खाना चाहिए।
39. सफेद मरसा : सफेद मरसा के बीजों को भूनकर खाने से पित्त की वृद्धि कम हो जाती है। यह पित्त को शान्त करने में फायदेमन्द है। सफेद मरसा के पत्तों का साग भी खाने से फायदा होता है।
40 . चूका साग : चूका साग को, साग के रूप में खाने से पित्त के बढ़ने में लाभ होता है और जलन में भी शान्ति मिलती है।
41. आलूबुखारे : आलूबुखारे का रस 40 से 80 मिलीलीटर तक या काढ़ा 20 से 40 मिलीलीटर तक सुबह-शाम पिलाने से पित्त शान्त होती है।
42 . आलूचा : यह भी आलूबुखारे का ही भेद है। इसे भी पित्त शान्त करने के लिए रस या काढ़े के रूप में उपयोग में लाया जाता है।
43. ऊदसलीब : अगर पित्त बराबर मात्रा में नहीं निकल रहा हो तो ऊदसलीब की जड़ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।
44. कासनी ग्राम्य : कासनी ग्राम्य का फल खाने से पित्त की जलन और परेशानी दूर होती है।
45. कुंगकु की छाल : पित्त को कम व नियंत्रित रखने के लिये कुंगकु की छाल को पानी में उबालकर 40 से 80 मिलीलीटर सुबह-शाम पीने से पित्त बाहर निकल जाती है।
46. गिरिपर्पट की रेजिन : गिरिपर्पट की रेजिन 0.12 ग्राम से 0.24 ग्राम खाने से पित्त बाहर निकल जाती है। इसकी क्रिया धीरे-धीरे होती है मगर यह तेज होती है।

10.10.17

दाद और खुजली की घरेलू,देसी चिकित्सा


बाजार से 50 ग्राम गंधक ले आए। ये आपको जड़ी बूटी बेचने वाले से मिल जाएगी। शुद्ध गंधक लेने की जरूरत नहीं है। इसे बारीक पीस ले। लगभग 6-9 इंच चौड़ा और 12-18 इंच लंबा सूती कपड़े का टुकड़ा ले। यह पुराने बानियान का भी ले सकते है। इस टुकड़े पर गंधक फैला दे। फिर इसका इस तरह रोल/रस्सी बनाए की गंधक बाहर न निकले। फिर इसे सूती धागे से इस तरह बांध दे कि लटकाने पर भी कपड़े कि रस्सी से गंधक बाहर न निकले। अब इसे एक 2 फुट लंबी लकड़ी कि छड़ी से बांध दे। उसके बाद उस गंधक वाले कपड़े की रस्सी पर इतना सरसो के तेल लगाए कि यह और अधिक तेल न सोख सके। अब उस कपड़े रस्सी के नीचे बड़ी कटोरी रख कर उस कपड़े की रस्सी को आग लगाए। इस प्रकार जलाने से जो तेल नीचे बर्तन मे टपके उसे सफाई से एक काँच की बोतल मे रखे। यदि जले हुए कपड़े का कोई टुकड़ा बर्तन मे गिर जाए तो तेल को छान लें। खुले घाव पर यह तेल न लगाए। यह केवल बाहरी प्रयोग के लिए हैं। आंखो मे यह तेल न जाने पाए।
जब यह रस्सी जलती है तो धुआँ निकलता है उससे स्वयं को बचाए।
प्रयोग –
दाद के लिए –
दाद को किसी कठोर कपड़े से या बर्तन साफ करने के स्क्रबर से दाद को खुजाए। उस पर यह तेल लगा कर पीपल या केले के पत्ते का टुकड़ा रख कर पट्टी बांध दे।
खुजली के लिए – (सुखी या गीली )
खुजली पर यह तेल लगाए। उसके बाद उस अंग पर भाप से सेक करे। बिना भाप के यह धीमे लाभ करता है। यदि पूरे शरीर पर खुजली हो तो तेल लगा कर धूप मे बैठे। 1 घंटे बाद गरम पानी से नहाए।

13.9.17

मधुमेह (डायबीटीज़) की खोजपूर्ण जानकारी,कारण और घरेलू उपचार // Information on diabetes, causes and home remedies



क्या है मधुमेह-
जब रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो उसे मधुमेह रोग कहते हैं। खाली पेट होने पर रक्त में सामान्य तौर पर शर्करा का स्तर 110 मिग्रा से कम और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के दो घंटे बाद 140 मिग्रा से कम हो तो यह सामान्य होता है। लेकिन मधुमेह की स्थिति में खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर 126 और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के 2 घंटे बाद 200 मिग्रा से अधिक होता है।मधुमेह के मुख्य लक्षण
थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता।

पैर का घाव ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना।

अधिक पेशाब और भूख लगना।

तेजी से वजन गिरना।

बार-बार चश्मे का नंबर बदलना।

जननांगों में खुजली और संक्रमण होना।

हृदय आघात, मस्तिष्क आघात का होना।

डायबिटीज के मरीजों को अब अपनी शुगर (रक्त शर्करा) को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का इंजेक्शन बार-बार नहीं लगाना पड़ेगा। इंसुलिन पंप से उनकी यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। डायबिटोलोजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा ने बताया कि कई बच्चों को डायबिटीज की बीमारी जन्म से ही सौगात में मिलती है। इन बच्चों को रोज-रोज इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाना काफी कष्टप्रद होता है। इन बच्चों को इंजेक्शन से निजात दिलाने के लिए इंसुलिन पंप एक कारगर उपाय है। इंसुलिन पंप बच्चों के साथ हर उम्र के लोग लगवा सकते हैं।

क्या है इंसुलिन पंप

डॉ. शर्मा के अनुसार इंसुलिन पंप एक पेजर के आकार का उपकरण है। इसमें एक इंसुलिन वायल फिट हो जाता है। यह उपकरण एक पतली नीडिल और इंफ्यूजन सेट के माध्यम से शरीर से जुड़ा रहता है। यह पंप शरीर के लिए आवश्यक इंसुलिन रक्त में मिलाता रहता है। इसके लिए अलग से इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं होती। इसकी खास बात यह है कि यह शरीर में बनने वाले इंसुलिन की तरह ही प्राकृतिक इंसुलिन की सप्लाई करता

क्या हैं मधुमेह के शुरुआती लक्षण

मधुमेह के शुरूआती लक्षणों की पहचान अगर हो जाए तो इसका इलाज बहुत ही जल्दी और आसानी से हो सकता है। आजकल मधुमेह एक आम समस्या बन गई है। कई लोगों में यह बीमारी शुरू में हो जाती है लेकिन, उनको इस बात का पता नहीं चल पाता है जिसके कारण यह बीमारी बहुत ही खतरनाक हो जाती है। दरअसल डायबिटीज लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब शरीर में पैंक्रियाज नामक ग्रंथि इंसुलिन बनाना बंद कर देती है तब मधुमेह की समस्या होती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद करता है। आइए हम आपको बताते हैं कि मधुमेह के शुरूआती लक्षण क्या हैं।

मधुमेह के शुरूआती लक्षण –

थकान महसूस होना -

डायबिटीज होने पर इसके शुरुआती दिनों में आपको सारा दिन थकान महसूस होगी। हर रोज भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर में थकान सी महसूस होगी। इससे यह पता चलता है की खून में शुगर का लेवल लगातार बढ़ रहा है।

लगातार पेशाब लगना –

मधुमेह होने पर बार-बार पेशाब आने लगता है। जब शरीर में ज्यादा मात्रा में शुगर इकट्ठा हो जाता है तो यह पेशाब के रास्ते से बाहर निकलता है, जिसके कारण मधुमेह रोगी को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत शुरू हो जाती है।

अत्यधिक प्यास लगना –

मधुमेह रोगी को बार-बार प्या स लगती है। चूंकि पेशाब के रास्ते से शरीर का पानी और शुगर बाहर निकल जाता है जिसके कारण हमेशा प्यास लगने जैसी स्थिति बनी रहती है। लोग अक्सर इस बात को हल्के में ले लेते हैं और समझ ही नहीं पाते कि उनकी बीमारी की शुरुआत अब हो चुकी है।

आंखें कमज़ोर होना-

मधुमेह रोग की शुरूआत में आंखों पर काफी प्रभाव पडता है। डायबिटीज के मरीज में रोग की शुरूआत में ही आंखों की रोशनी कम होने लगती है और धुंधला दिखाई पडने लगता है। किसी भी वस्तु को देखने के लिए उसे आंखों पर ज़ोर डालना पडता है।

अचानक वज़न कम होना –

मधुमेह रोग की शुरूआत में ही अचानक वज़न तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा आदमी का वजन एकाएक कम होने लगता है।

जोर से भूख लगना -

डायबिटीज के मरीज का वजन तो कम होता है लेकिन भूख में बढोतरी भी होती है। अन्य दिनों की अपेक्षा आदमी की भूख कई गुना बढ जाती है। बार-बार खाना खाने की इच्छा होती है।

घाव का जल्दी न भरना –

अगर आपके शरीर में चोट या कहीं घाव लग जाए और यह जल्दी ना भरे, चाहे कोई छोटी सी खरोंच क्यों ना हो, वह धीरे-धीरे बडे़ घाव में बदल जाएगी और उसमें संक्रमण के लक्षण साफ-साफ दिखाई देने लगेंगे।

तबियत खराब रहना -

डायबिटीज मरीज के शरीर में किसी भी तरह का संक्रमण जल्दी से ठीक नही होता है। अगर आपको वायरल, खॉसी-जुकाम या कोई भी बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाए तो आपको राहत नहीं मिलेगी। छोटे-छोटे संक्रमण जो आसानी से खुद ठीक हो जाते हैं बढे घाव बन जाते हैं।

त्वचा के रोग होना –

मधुमेह की शुरूआत में त्वचा संबंधी कई रोग होने शुरू हो जाते हैं। त्वचा के सामान्य संक्रमण बडे घाव बन जाते हैं।

आनुवंशिक कारण – 


आपके परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी मधुमेह की समस्या रही हो तब भी आपको सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है।
हालांकि डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अपने डॉक्टर से सलाह लें और समय-समय पर शुगर लेवल का चेकअप करवाते रहें।
जिम जाने से पुरूषों में मधुमेह का खतरा कम
लंदन: नियमित रूप से जिम जाने से पुरूषों में मधुमेह का खतरा कम हो सकता है एक नये अध्ययन में यह बात कही गयी है।
हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार शरीर को दुरूस्त कर पुरूष टाइप 2 मधुमेह का खतरा कम कर सकते हैं।
इस शोध में पाया गया कि नियमित रूप से वजन कम करने की कसरत करने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा 34 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
डेली मेल की खबर के अनपुसार एरोबिक कसरतों से, जैसे तेज चलने या दौड़ने से, और भी ज्यादा फायदा हो सकता है।
हॉवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पोषण विशेषज्ञ प्रोफेसर फ्रैंक हू ने कहा, ‘इस अध्ययन से पता चलता है कि वजन कम करने से मधमुह का खतरा कम हो सकता है।’ इस शोध के लिए 32,000 अमेरिकियों का स्वास्थ्य संबंधी अध्ययन किया गया जिसमें उनके सवास्थ्य पर जीवनशैली के प्रभावों की जांच की गयी। (
टीवी देखने वाले उम्रदराज लोगों मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है|

मेलबहै|है|र्न: वैज्ञानिकों ने आस्ट्रेलिया में अधिक टीवी देखने वाले उम्रदराज लोगों को चेतावनी दी है कि इससे उनमें टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के अध्ययन में पाया गया कि 60 साल से अधिक उम्र के आस्ट्रेलियाई प्रतिदिन औसतन चार घंटे टीवी देखते हैं जबकि उनसे कम उम्र के लोग करीब तीन घंटे ही रोजाना टीवी देखते हैं।
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि अधिक टीवी देखने वाले लोगों में उपापचयी लक्षण विकसित होने के खतरे बढ़ जाते हैं।
यूक्यू स्कूल ऑफ पोपुलेशन हेल्थ के डॉ. पॉल गार्डिनर के नेतृत्व में किया गया अध्ययन अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसके तहत सुस्त व्यवहार और बुजुर्गों पर टीवी देखने के असर की जांच की गई। गार्डिनर ने बताया कि अभी तक अधिकांश अध्ययन बच्चों के बैठने और टीवी देखने के बारे में ही किए गए थे।
मधुमेह से बचने के लिए लोगों को रोजाना कम से कम चार कप चाय पीनी चाहिए ।
लंदनः बिट्रेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मधुमेह से बचने के लिए लोगों को रोजाना कम से कम चार कप चाय पीनी चाहिए ।
अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने यूरोप में टाइप-2 से पीड़ित 12000 से अधिक चाय की आदत वाले लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठी की। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि रोजाना चार कप चाय पीने वालों में मधुमेह का जोखिम 20 प्रतिशत कम था।
अध्ययन में पाया गया कि अधिक चाय पीने वालों में जोखिम काफी कम था जबकि एक से तीन कप चाय पीने वालों में यह जोखिम अधिक था । शोधकर्ताओं ने हालांकि, आगाह किया कि दूध और चीनी मिली चाय का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए खराब है ।
अध्ययन करने वाले जर्मनी के हेनरिख विश्वविद्यालय के क्रिश्चियन हर्डर ने बताया, मोटापा टाइप-2 मधुमेह का एक बड़ा कारण है लेकिन खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसमें चाय भी शामिल है ।
मधुमेह की बीमारी से बचना सादा पानी पीना शुरू कर दें।
लंदन : मधुमेह के रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अगर आप मधुमेह की बमारी से बचना चाह रहे हैं तो उर्जावर्धक पेयों और जूस से दूर रहें एवं सादा पानी पीना शुरू कर दें।
हार्वड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने कहा कि चीनी मिश्रित पानी से सादा पानी कहीं अधिक गुणकारी है और मधुमेह में लाभदायक है। करीब एक दशक से 83 हजार महिलाओं के पीने के आदतों पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि मीठा पेय पदार्थ पीने वाले लोगों की अपेक्षा जो सादा पानी पीते हैं उनमें मधुमेह होने का खतरा आठ प्रतिशत कम होता है।
मुख्य शोधकर्ता डाक्टर फ्रैंक हू ने कहा कि इससे पता चलता है कि चीनी मिश्रित पेय पदार्थ मधुमेह के खतरे को बढ़ाता है।
मधुमेह से बचना चाहते हैं तो धीमे खाएं।
लंदन: अगर आप मधुमेह से बचना चाहते हैं तो धीमे खाएं। इस बात का खुलासा एक नए अध्ययन में किया गया है। लिथुवानियन यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो लोग तेजी से खाना खाते हैं उनमें टाइप-2 मधुमेह विकसित होने का खतरा वैसे लोगों की तुलना में ढाई गुना अधिक होता है जो भोजन का स्वाद ले-लेकर खाते हैं।
यह पूर्व में किए गए शोध की तर्ज पर है जिसमें तेजी से खाना खाने और मोटापा के बीच संबंध पाया गया था। लेकिन पहली बार लोगों के खाने की गति की पहचान टाइप टू मधुमेह होने के लिए स्वतंत्र खतरे के कारक के तौर पर की गई है।
लंदन: जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम रहता है, उन्हें मधुमेह होने का खतरा अधिक है। यह बात एक नए अध्ययन में कही गई। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के इस परिणाम से यह भी समझने में मदद मिलती है कि आखिर क्यों उम्र बढ़ने के साथ मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर घटता जाता है।
विश्वविद्यालय के बयान के मुताबिक एडिनबर्ग के अंत:स्राविका इकाई के केरी मैकइंस ने कहा कि इस अध्ययन से पता चलता है कि टेस्टोस्टेरॉन के कम स्तर से मधुमेह का जोखिम रहता है, चाहे पुरुष का वजन कुछ भी क्यों न हो।
सिडनी : मोटे और 'टाइप-2' प्रकार के मधुमेह से पीड़ित लोग अब बड़ी आसानी से दिल के दौरे के खतरे को कम कर सकते हैं। एक नए के अनुसार अगर ऐसे लोग अपना वजन छह किलोग्राम तक भी घटाते हैं, तो उनकी धमनियों की कठोरता 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा छह गुना ज्यादा होता है। मधुमेह से हुई कुल मौतों में से 68 प्रतिशत मौतों का कारण धमनियों की कठोरता पाया गया है।
विज्ञान पत्रिका 'डायबीटिज एंड वैस्कुलर डिजीज रिसर्च' की रिपोर्ट के अनुसार ग्रारवेन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के सहायक प्रोफेसर कैथरीन सामारास और सैंट विन्सेंट्स अस्पताल के क्रिस्टोफर हेवर्ड ने अध्ययन में बताया कि धमनी कठोरता का सीधा संबंध सूजन और संक्रमण या बीमारी के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के साथ है। ग्रारवेन इंस्टीट्यूट और सैंट विन्सेंट्स अस्पताल के बयान के मुताबिक यह अध्ययन 'टाइप-2' प्रकार के मधुमेह से पीड़ित मोटे लोगों के एक समूह पर आधारित है। सभी प्रतिभागियों को 24 हफ्तों तक कैलोरी रहित आहार दिया गया।
समारास ने बताया कि अध्ययन से पता चला, ‘मोटापा, टाइप-2 प्रकार का मधुमेह और धमनियों की कठोरता सभी प्रतिरक्षी कोशिकाओं के संचलन और वसा ऊतकों के सक्रियण जैसी उत्तेजक स्थिति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह पहला ऐसा अध्ययन है, जिसमें वजन घटाने से धमनी कठोरता में कमी आने के संबंध का पता चला है।
नींद मधुमेह
वाशिंगटन: यदि रात में नींद के लिए आपको काफी मशक्कत करनी पड़ती है तो आपको ध्यान देने की जरुरत है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ऐसा है तो आपको मधुमेह, मोटापा के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
बोस्टन में ब्रिघम एंड वीमेंस अस्पताल के अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्रति दिन पांच घंटे से कम नींद लेते हैं उनके मेटाबोलिक रेट में बड़ा बदलाव आता है। यहां तक कि एक साल में 4.5 से 5.5 किलो वजन का इजाफा हो जाता है। जब यह लंबे समय तक यह जारी रहता है तो मोटापा, मधुमेह का खतरा मंडराने लगता है।
अध्ययन को अंजाम देने वाले न्यूरोलॉजिस्ट और नींद विशेषज्ञ ओरफेयू बक्सटन कहते हैं, ‘तीन या चार वर्ष के भीतर ही आप मोटे हो जाते हैं।’ करीब छह सप्ताह तक बक्सटन और उनके सहयोगियों ने इसका अध्ययन किया। शोध से तीन सप्ताह पहले लोगों को 10 घंटे सोने को कहा गया। इसके बाद फिर 28 घंटे के अंदर करीब पांच घंटे तक नींद लेने को कहा गया। इस दौरान इंसुलीन और ग्लूकोज स्तर का पता लगाया गया।
लंदन : डायटिंग के दौरान गर्भधारण करने वाली महिलाओं के बच्चों में मोटापा और टाइप-2 मधुमेह होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं।
ब्रिटेन में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि हालांकि उन्होंने यह शोध भेड़ों पर किया है लेकिन यह मनुष्यों के लिए भी सही हो सकता है। शोधकर्ता डॉक्टर एनी व्हाइट का कहना है कि शोध से यह बात सामने आयी है कि कैसे हमारा व्यवहार आने वाली पीढ़ी में मोटापे और मधुमेह पर असर डाल सकता है।
डॉक्टरों ने बताया, ‘इस शोध से जुड़वा बच्चों में होने वाली मधुमेह की समस्या के लिए नयी समझ विकसित हो सकती है । इसके परिणाम यह भी बताते हैं कि डायटिंग की अवस्था में गर्भधारण करने पर उससे पैदा होने वाला बच्चा बाद में मोटापे का शिकार हो सकता है।’ टीम ने इसके लिए भेड़ को गर्भधारण के वक्त कम भोजन दिया था।
सफेद चावल खाने से मधुमेह
लंदन : हार्वर्ड के एक नए अनुसंधान में कहा गया है कि अगर आप रोज एक बड़ा बाउल सफेद चावल खाते हैं तो आपको टाइप-2 मधुमेह होने का खतरा सामान्य से 11 प्रतिशत ज्यादा होता है। लेकिन आहार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी जल्दी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए।
इस अनुसंधान का परिणाम ‘ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है। इसके लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 22 वर्ष की अवधि में 3,50,000 लोगों का अध्ययन किया। शोध आरंभ होने के वक्त किसी को भी मधुमेह की शिकायत नहीं थी।
‘हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ और ‘हार्वर्ड मेडिकल स्कूल’ की टीम ने इसके लिए एशिया के दो देशों चीन और जापान तथा पश्चिम के दो देशों अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि रोज एक बड़ा बाउल सफेद चावल खाने से टाइप-2 मधुमेह का खतरा 11 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
डेली टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, आहार विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिकों को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए। अभी तक इस अनुसंधान में सभी बातों की पुष्टि नहीं हुई है
धूम्रपान मधुमेह
टोक्यो : यदि धूम्रपान करते हैं तो हो जाइए सावधान। नेशनल कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं के एक दल ने अपने शोध में पाया है कि धूम्रपान छोड़ने के पांच साल बाद तक भी सिगरेट पीने वालों के मुधमेह की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।
40 से 69 आयु वर्ग के 59 हजार लोगों पर 1990 से 2003 के बीच किए गए शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि धूम्रपान करने वालों के मधुमेह की चपेट में आने की आशंका अधिक रहती है।
धूम्रपान छोड़ने के पांच साल बाद भी सिगरेट पीने वाले महिलाओं और पुरूषों में इस बीमारी के उभरने की संभावना 2. 84 फीसदी होती है। लेकिन पांच साल के बाद सिगरेट छोड़ने वालों को धूम्रपान का खतरा धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों के समान ही होता है।
मधुमेह रोज चार कप कॉफी पीना मधुमेह के खतरे का कम
लंदन : क्या आप मधुमेह के खतरे को कम करना चाहते हैं तो दिन में चार कप कॉफी पिएं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि रोज चार कप कॉफी पीना मधुमेह के खतरे का कम कर सकता है।
पहले के अध्ययनों से पता चला था कि कॉफी पीने से मुधमेह का खतरा कम होता है लेकिन इसके परिणामों को लेकर विरोधभास था कि क्या यह कैंसर जैसी दीर्घकालीक बीमारियों को बढ़ावा देता है।
अब यूरोप की एक टीम ने दावा किया है कि हर दिन सामान्य मात्रा में काफी पीने वाले लोगों में मधमेह (टाइप टू) का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी कम हो सकता है जो कभी-कभी इसे पीते हैं या कभी नहीं पीते।
तीन कप चाय हमें दिल के दौरे और टाइप-2 मधुमेह जैसी बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।
लंदन: अक्सर हम में बहुत से लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि एक दिन में कितने कप चाय का सेवन किया जाए। हालही में शोधकर्ताओं ने नए अध्ययन में दावा किया है कि रोजाना तीन कप चाय हमें दिल के दौरे और टाइप-2 मधुमेह जैसी बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार एक अध्ययन से पता चला है कि नियमित रूप से चाय पीना रक्त शर्करा और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर दिल की बीमारियों के जोखिम को घटाता है। यह बात दूध वाली और दूध रहित चाय दोनों पर लागू होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार चाय के इतने बड़े पैमाने पर लाभ उसके फ्लेवोनोइड तत्च (हृदय रोगों से बचाने वाला एंटीऑक्सीडेंट तत्व) की वजह से है।
चाय का एक प्याला आपको 150 से 200 एमजी फ्लेवोनोइड तत्च प्रदान करता है और यह हमारे आहार में एंटीऑक्सीडेंट्स का सर्वश्रेष्ठ स्त्रोत है।
विज्ञान पत्रिका 'न्यूट्रीशन बुलेटिन' के अनुसार एक दिन में दूध रहित चाय के तीन या उससे अधिक कप आपको दिल की बीमारियों से बचाते हैं, जबकि दो या उससे अधिक कप टाइप-2 मधुमेह से बचाते हैं।
अध्ययन के सह लेखक और 'टी एडवाइजरी पैनल' (टीएपी) के सदस्य पोषण विशेषज्ञ कैरी रूक्सटोन ने कहा, इस लोकप्रिय पेय के जितने लाभ हमें मालूम हैं, वास्तव में चाय के उससे कहीं ज्यादा फायदे हैं। बारह सप्ताहों तक चले इस अध्ययन में 87 प्रतिभागियों को शामिल किया गया।
इसके साथ ही शोध से पता चला कि रोजना तीन कप चाय पीने से प्रतिभागियों में हृदय सम्बंधी बीमारियों के जोखिम में सुधार आया।
चाय मे पाया जाने वाला फ्लेवोनोइड तत्च सूजन को नियंत्रित करने और रक्त के अधिक थक्के जमने के जोखिम को कम करने जैसी बहुत सी चीजों में सहायक है।
मधुमेह की शुरूआत संभवत: आंत से होती है ।
वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने ऐसे सबूत मिलने का दावा किया है कि मधुमेह संभवत: आंतों से जन्म लेता है । इस खोज से इस बीमारी के इलाज में आगे जाकर काफी मदद मिलने की उम्मीद जगी है । वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल आफ मेडिसिन के एक दल का कहना है कि रक्त शर्करा को नियंत्रित करने संबंधी समस्या संभवत: आंत से शुरू होती है । अपने शोध में वैज्ञानिकों ने चूहों का अध्ययन किया जो आंत में फैटी एसिड सिंथेस बनाने में सक्षम नहीं होते हैं ।
एफएएस एक एंजाइम होता है जो लिपिड्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । एफएएस को इंसुलिन द्वारा नियंत्रित किया जाता है और जो लोग मधुमेह की बीमारी से पीड़ित होते हैं उनका एफएएस विकृत होता है । चूहों की आंतों में इस एंजाइम के बिना भयंकर जलन शुरू हो गयी जो मधुमेह का शक्तिशाली संकेत है ।
chitrप्रमुख शोधकर्ता क्ले सीमनकोविच ने कहा कि मधुमेह की शुरूआत संभवत: आंत से होती है । जब लोगों में इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है तो एफएएस उचित ढंग से काम नहीं कर पाता और इससे जलन होती है और उसके बदले में मधुमेह उत्पन्न हो जाता है । इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता वजन बढ़ने पर होती है । ’
विटामिन डी के कम स्तर वाले मोटे बच्चों मेंमधुमेह
लंदन : नए अध्ययन में दावा किया गया है कि विटामिन डी के कम स्तर वाले मोटे बच्चों में टाइप-2 मधुमेह विकसित होने का खतरा अधिक होता है।
डलास स्थित यूनीवर्सिटी आफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि निम्न विटामिन डी स्तर मोटे बच्चों में इंसूलिन प्रतिरोधक अधिक होता है जिसका मतलब है कि वे खाद्य पदार्थों से शंकर को उर्जा में तब्दील करने के लिए इंसूलिन का ठीक तरीके से प्रयोग नहीं कर सकते।
टाइप 2 मधुमेह उस समय होता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसूलिन नहीं बनता या जब कोशिकाओं में इंसूलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।
लंदन : हृदयरोग और मधुमेह जैसे रोगों से बचने के लिए सादा और स्वास्थ्यवर्धक आहार की काफी बड़ी भूमिका है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर आप एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर केला, सेब, आदि सादा और स्वास्थ्यवर्धक आहार लेते रहते हैं तो आप इन रोगों का खतरा टाल सकते हैं।
अध्यनकर्ताओं ने पाया है कि एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आहार लेने वाले लोगों में हृदयरोग का खतरा तो कम होता ही है कोलस्ट्रोल और ब्लड शुगर का स्तर भी नियंत्रण में रहता है।
‘डेली एक्सप्रेस’ की खबरों के मुताबिक एंटीऑक्सिडेंट शरीर में नुकसानदेह मॉलीक्युल से लड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक साल तक के अध्ययन के बाद यह आकलन सामने आया है। (एजेंसी)
लंदन : मधुमेह पीड़ित लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जल्द ही वे इसका इलाज ढूंढ निकालने वाले हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार पैन्क्रियाज अर्थात अग्नायशय को नियंत्रित कर इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ेगी। इलिनोइस विश्वविद्यालय के दल ने स्टेम कोशिकाओं की मदद से मधुमेह पीड़ित व्यक्ति के टी सेल को मधुमेह के प्रति रक्षक बनाने की तैयारी की है। ‘बी एम सी’ मेडिकल जर्नल के अनुसार, इस विधि से 38 प्रतिशत तक इंसुलिन की जरूरत को कम किया जा सकेगा।
व्यक्ति टाइप 1 मधुमेह से तब पीड़ित होता है जब प्रतिरोधक प्रणाली इंसुलिन पैदा करने वाली बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है और ग्लुकोज के स्तर अनियंत्रित हो जाता है। इस दल का नेतृत्व करने वाले डॉ योंग झाओ ने कहा कि यह मधुमेह के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
सेहत के लिहाज से गाय का दूध फायदेमंद मधुमेह से लड़ने में
पालमपुर: सेहत के लिहाज से गाय का दूध फायदेमंद तो है ही, अब एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि हिमाचल प्रदेश में पली-बढ़ी गाय के दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन हृदय की बीमारी, मधुमेह से लड़ने में कारगर और मानसिक विकास में सहायक होता है।
चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में पशुचिकित्सा सूक्ष्मजैविकी विभाग के शोधार्थियों ने बताया, 'पहाड़ी' गाय की नस्ल की दूध में ए-2 बीटा प्रोटीन ज्यादा मात्रा में पाया जाता है और यह सेहत के लिए काफी अच्छा है।' उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 43 पहाड़ी गायों पर किए जा रहे अध्ययन में यह बात सामने आई है।
लगभग 97 फीसदी मामलों में यह पाया गया कि इन गायों के दूध में ए-2 बीटा प्रोटीन मिलता है जो हृदय की बीमारी, मधुमेह और मानसिक रोग के खिलाफ सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हॉलस्टीन और जर्सी नस्ल की गायों में यह प्रोटीन नहीं पाया जाता। इन गायों में ए-1 जीन पाया जाता है जो इन बीमारियों को मदद पहुंचाता है। ए-1 जीन स्थानीय गायों के दूध में हमेशा मौजूद नहीं होता लेकिन इसे नकारा भी नहीं जा सकता।

9.9.17

माँ का दूध बढ़ाने वाले भोजन // Mother's milk-enhancing food

  

         माँ के लिए अपने बच्चे को पहली बार स्तनपान करना अविस्मरणीय और ममता से भरा अहसास होता है। शिशु के लिए माँ का दूध अमृत के समान होता है। माँ का पहला दूध बच्चे को जीवन भर कई बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है
   यही नहीं स्तनपान से माँ और शिशु का रिश्ता भी मजबूत बनता है। लेकिन कई बार माँ के स्तनों में भी दूध की कमी हो जाती है। यह बच्चे और माँ दोनों के लिए बहुत गंभीर स्तिथि होती है। इसी के मद्देनज़र रखते हुए हम आज के आर्टिकल में सिर्फ आपके लिए लाये है कुछ आसान उपाय।
आप अपने बच्चे को पर्याप्त दूध नहीं पिला पाती हैं तो यह वाकई में आपके लिये बहुत बडी़ चिंता का विषय है। ब्रेस्ट मिल्क कम  होने के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे, तनाव, डीहाइड्रेशन, अनिद्रां आदि। लेकिन ऐसी कइ प्रभावशाली विधियां हैं जिससे आप ब्रेस्ट मिल्क बढा सकती हैं। आपको केवल अच्छे प्रकार का आहार खाना होगा जो कि बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव ना डाले। इन्हें अपने रोजाना के खाने में प्रयोग करें और ब्रेस्ट मिल्क की सपलाई को बढाएं। खाएं यह आहार-
मेथी - 
इसमें आयरन, विामिन, कैल्शियम और मिनरल पाए जाते हैं। मेथी का प्रयोग कई पुराने सालों से किया आता जा रहा है और रिसर्च भी इस बात से सहमत है। लेकिन इसे ज्यादा ना खाएं वरना डीहाइड्रेशन भी हो सकता है। मेथी को कच्चा खाने की बजाए इसको सब्जी में डाल कर खाएं।लहसुन - इसे खाने से भी दूध बढने की क्षमता बढती है। कच्चा लहसुन खाने से अच्छा होगा कि आप उसे मीट, करी, सब्जी या दाल में डाल कर पका कर खाएं। अगर आप लहसुन को रोजाना खाना शुरु करेंगी तो यह आपको जरुर फायदा पहुंचाएगा।
मेवा - 
बादाम और काजू जैसे मेवे ब्रेस्ट मिल्क बढाने में सहायक होते हैं। इसके अलावा यह विटामिन, मिनरल और प्रोटीन में काफी रिच होते हैं। अच्छा होगा कि आप इन्हें कच्चा ही खाएं।
करेला - 
इसके अंदर विटामिन और मिनरल अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जिससे ब्रेस्ट मिल्क बढाने की क्षमता बढ जाती है। यह स्त्री में लैक्टेशन सही करता है। करेला बनाते वक्त हल्के मसालों का प्रयोग करें जिससे यह आसानी से हजम हो सके।
तुलसी:-
तुलसी के सेवन करने से न केवल बीमारियां ठीक हो जाती है बल्कि यह स्तन क दूध को बढ़ाने में भी मददगार होता है। इसके अंदर विटामिन क की मात्र अधिक पायी जाती है। आप इसको सूप म या कच्चे शहद के साथ भी खा सकते है।
यदि किसी महिला को आर्थिक या घर सम्बंधित समस्या रहती है या फिर झगडे या पारवारिक कलह की वजह से चिंतित रहती है तो इसको दूर कर अपने मन को शांत रखे ताकि आप अपने बच्चे पर अच्छी तरह से कंसन्ट्रेट कर सकेगी।
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