13.1.18

स्पाइजेलिया का होम्योपैथिक उपयोग



स्नायु-शूल (दर्द) की दवा – 
इस औषधि का क्षेत्र स्नायु के शूल, अर्थात् दर्द के ऊपर विशेष रूप से है। हृदय, सिर, चेहरे, आंख के दर्द के ऊपर इसका मुख्य-प्रभाव है। हृदय-शूल तथा शिर शूल जो दायीं आंख के ऊपर आकर जम जाय – इन दोनों में इसका विशेष प्रयोग होता है। इन्हीं की यहां चर्चा की जायेगी।
हृदय-शूल (Pain in the heart) – 
हृदय शूल के लिये यह अमूल्य-औषधि है। इस औषधि का हृदय का दर्द इतना ‘तेज’ होता है जितना कैक्टस में और इतना ‘उग्र’ होता है जितना कैक्टस और डिजिटेलिस दोनों में नहीं होता। स्पाइजेलिया का हृदय शूल इतना उग्र होता है कि कपड़ों के भीतर से हृदय धड़कता दीखता है, सारी छाती हिलती दीखती है, और कुछ दूरी से हृदय धड़कता सुनाई भी पड़ता है। हृदय के हाल ही के दौर पर ही इसका प्रभाव नहीं होता, परन्तु हृदय के पुराने वैल्व्यूलर-रोग में भी जिसमें तेज आवाज और उग्र धड़कन होती है इससे लाभ होता है। डॉ० नैश लिखते हैं कि हृदय की धड़कन के उग्र दौरों को उन्होंने इससे शीघ्र शांत होते देखा है। इस प्रकार के हृदय के शूल में रोगी केवल दाईं तरफ और सिर ऊंचा करके ही लेट सकता है। ऐन्जाइना पैक्टोरिस जो हृदय का रोग है, और जिसमें हृदय का दर्द सीने से प्रारम्भ होकर बायें कन्धे और बायीं बांह तक फैल जाता है, उसमें भी यह विशेष लाभदायक है।
 
शिर:शूल (Neuralgic headache) – 
सिर-दर्द, चेहरे का दर्द तथा आंखों के दर्द में इस औषधि का प्रमुख स्थान है। सिर-दर्द प्राय: एक तरफ होता है। प्रात: काल सूर्य के उदय के साथ यह शुरू होता है, ज्यों-ज्यों सूर्य चढ़ता जाता है त्यों-त्यों यह बढ़ता जाता है, और सूर्य के अस्त होने के साथ यह समाप्त हो जाता है। यह दर्द सिर की गुद्दी से उठता है, सिर पर चढ़कर बायीं आंख के ऊपर जाकर ठहर जाता है। नैट्रम म्यूर और टैबेकम में भी सिर-दर्द सूर्य के उदय तथा अस्त के साथ बढ़ता और घटता है। स्पाइजेलिया में जिस आंख के ऊपर दर्द जमता है उसमें से पानी निकलने लगता है। चैलीडोनियम में दर्द बायीं आंख पर जमता है, और उसमें से पानी की धार बहा करती है। स्पाइजेलिया में रोगी को किसी तरफ भी देखने के लिए सारा सिर फिराना पड़ता है।
शक्ति तथा प्रकृति –
 स्पाइजेलिया 6 , स्पाइजेलिया 30 (हरकत, शोर-गुल, आंख हिलाने से रोग बढ़ता है; ठंड, नमी तथा बरसात से रोग बढ़ता है; औषधि ‘सर्द’-प्रकृति के लिए है। )

8.1.18

सर्दियों के मौसम मे हितकारी आहार



    ठंड के मौसम में सर्दी के असर से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन शरीर को चाहे कितने ही गर्म कपड़ों से ढक लिया जाए ठंड से लड़ने के लिए बॉडी में अंदरूनी गर्मी होनी चाहिए। शरीर में यदि अंदर से खुद को मौसम के हिसाब से ढालने की क्षमता हो तो ठंड कम लगेगी और कई बीमारियां भी नहीं होंगी। यही कारण है कि ठंड में खानपान पर विशेष रूप से ध्यान देने को आयुर्वेद में बहुत महत्व दिया गया है। सर्दियों में यदि खानपान पर विशेष ध्यान दिया जाए तो शरीर संतुलित रहता है और सर्दी कम लगती है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में जानिए कुछ ऐसे ही खाने की चीजों के बारे में
बाजरा-
कुछ अनाज शरीर को सबसे ज्यादा गर्मी देते है। बाजरा एक ऐसा ही अनाज है। सर्दी के दिनों में बाजरे की रोटी बनाकर खाएं। छोटे बच्चों को बाजरा की रोटी जरूर खाना चाहिए। इसमें कई स्वास्थ्यवर्धक गुण भी होते है। दूसरे अनाजों की अपेक्षा बाजरा में सबसे ज्यादा प्रोटीन की मात्रा होती है। इसमें वह सभी गुण होते हैं, जिससे स्वास्थ्य ठीक रहता है। ग्रामीण इलाकों में बाजरा से बनी रोटी व टिक्की को सबसे ज्यादा जाड़ो में पसंद किया जाता है। बाजरा में शरीर के लिए आवश्यक तत्व जैसे मैग्नीशियम,कैल्शियम,मैग्नीज, ट्रिप्टोफेन, फाइबर, विटामिन- बी, एंटीऑक्सीडेंट आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
बादाम-
बादाम कई गुणों से भरपूर होते हैं। इसका नियमित सेवन अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार है।अक्सर माना जाता है कि बादाम खाने से याददाश्त बढ़ती है, लेकिन यह ड्राय फ्रूट अन्य कई रोगों से हमारी रक्षा भी करता है। इसके सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है, जो सर्दियों में सबसे बड़ी दिक्कत होती है। बादाम में डायबिटीज को निंयत्रित करने का गुण होता है। इसमें विटामिन – ई भरपूर मात्रा में होता है।
अदरक-
क्या आप जानते हैं कि रोजाना के खाने में अदरक शामिल कर बहुत सी छोटी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। सर्दियों में इसका किसी भी तरह से सेवन करने पर बहुत लाभ मिलता हैै। इससे शरीर को गर्मी मिलती है और डाइजेशन भी सही रहता
सब्जियां-अपनी खुराक में हरी सब्जियों का सेवन करें। सब्जियां, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और गर्मी प्रदान करती है। सर्दियों के दिनों में मेथी, गाजर, चुकंदर, पालक, लहसुन बथुआ आदि का सेवन करें। इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
तिल-
सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तिल के तेल की मालिश करने से ठंड से बचाव होता है। तिल और मिश्री का काढ़ा बनाकर खांसी में पीने से जमा हुआ कफ निकल जाता है। तिल में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे, प्रोटीन, कैल्शियम, बी कॉम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि। प्राचीन समय से खूबसूरती बनाए रखने के लिए तिल का उपयोग किया जाता रहा है।
मूंगफली-
100 ग्राम मूंगफली के भीतर ये तत्व मौजूद होते हैं: प्रोटीन- 25.3 ग्राम, नमी- 3 ग्राम, फैट्स- 40.1 ग्राम, मिनरल्स- 2.4 ग्राम, फाइबर- 3.1 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट- 26.1 ग्राम, ऊर्जा- 567 कैलोरी, कैल्शियम – 90 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 350 मिलीग्राम, आयरन-2.5 मिलीग्राम, कैरोटीन- 37 मिलीग्राम, थाइमिन- 0.90 मिलीग्राम, फोलिक एसिड- 20मिलीग्राम। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनिरल्स आदि तत्व इसे बेहद फायदेमंद बनाते हैं। यकीनन इसके गुणों को जानने के बाद आप कम से कम इस सर्दियों में मूंगफली से टाइमपास करने का टाइम तो निकाल ही लेंगे।
ओमेगा 3 फैटी एसिड-
सर्दियों में ओमेगा – 3 फैटी एसिड सबसे अच्छा फूड होता है। यह मुख्य रूप से मछलियों में पाया जाता है। सर्दियों में दिनों में मछली का सेवन करें, इससे शरीर को गर्मी मिलती है। इसमें जिंक भरपूर मात्रा में होता है है। इसलिए यह शरीर का इम्युनिटी पॉवर बढ़ाता है व बीमारियों को दूर रखता है।
रसीले फल न खाएं-
सर्दियों के दिनों में रसीले फलों का सेवन न करें। संतरा, रसभरी या मौसमी आपके शरीर को ठंडक देते है। जिससे आपको सर्दी या जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
शहद-
शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाए रखने के लिए शहद को आयुर्वेद में अमृत भी कहा गया है। यूं तो सभी मौसमों में शहद का सेवन लाभकारी है, लेकिन सर्दियों में तो शहद का उपयोग विशेष लाभकारी होता है। इन दिनों में अपने भोजन में शहद को जरूर शामिल करें। इससे पाचन क्रिया में सुधार होगा और इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ेगा।
बादाम-
बादाम कई गुणों से भरपूर होते हैं। इसका नियमित सेवन अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार है।अक्सर माना जाता है कि बादाम खाने से याददाश्त बढ़ती है, लेकिन यह ड्राय फ्रूट अन्य कई रोगों से हमारी रक्षा भी करता है। इसके सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है, जो सर्दियों में सबसे बड़ी दिक्कत होती है। बादाम में डायबिटीज को निंयत्रित करने का गुण होता है। इसमें विटामिन – ई भरपूर मात्रा में होता है।

10.12.17

अर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार // Home remedies for arthritis


    अर्थराइटिस का दर्द इतना तेज होता है कि व्यक्ति को न केवल चलने–फिरने बल्कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। घुटनों में दर्द होने के साथ–साथ दर्द के स्थान पर सूजन भी आ जाती है। इस दर्द से राहत दिलाने में आपका सबसे बड़ा हमदर्द होता है आहार और घरेलू नुस्खे। आइए जाने कैसे अर्थराइटिस में घरेलू नुस्खे सबसे सुरक्षित उपचार हैं।
कभी–कभी दर्द के कारण बुखार भी हो जाता है और यहां तक कि जोड़ों का आकार भी टेढ़ा हो जाता है। कुछ लोग तो अस्पतालों के चक्कर काटकाट कर इतने थक जाते हैं कि वो इस बीमारी के साथ जीने को स्वीकार कर लेते हैं।
ठंड के मौसम में गठिया के मरीज़ों को अधिक परेशानी होती है इसलिए उन्हें ठंड से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। इस बीमारी में चिकित्सक आहार पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं क्योंकि आप जो भी खाते हैं वो सीधा आपके स्वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है।
• अपने आहार में 25 प्रतिशत फल व सब्जि़यों को शामिल करें और ध्यान रखें कि आपको कब्ज़ ना हो।
• फलों में सन्तरे, मौसमी, केले, सेब, नाश्पाती, नारियल, तरबूज़ और खरबूज़ आपके लिए अच्छे हो सकते हैं।
• सब्जि़यों में मूली, गाज़र, मेथी, खीरा, ककड़ी आपके आदि लें।
• चोकरयुक्त आटे का प्रयोग करें क्योंकि इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है ।
दर्द से राहत पहुंचाने वाले घरेलू नुस्खे:
वात रोग (संधिवात)होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-
• वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। इसके लिए रोगी व्यक्ति को एक टब में गरम पानी लेकर उसमें आधा चम्मच नमक डाल लेना चाहिए। इसके बाद जब टब का पानी गुनगुना हो जाए तब रोगी को टब के पास एक कुर्सी लगाकर बैठ जाना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को अपने पैरों को गरम पानी के टब में डालना चाहिए और सिर पर एक तौलिये को पानी में गीला करके रखना चाहिए। रोगी व्यक्ति को अपनी गर्दन के चारों ओर कंबल लपेटना चाहिए। इस प्रकार से इलाज करते समय रोगी व्यक्ति को बीच-बीच में पानी पीना चाहिए तथा सिर पर ठंडा पानी डालना चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी को कम से कम 20 मिनट में ही शरीर से पसीना निकलने लगता है जिसके फलस्वरूप दूषित द्रव्य शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वात रोग ठीक होने लगता है।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए 2 बर्तन लें। एक बर्तन में ठंडा पानी लें तथा दूसरे में गरम पानी लें और दोनों में 1-1 तौलिया डाल दें। 5 मिनट बाद तौलिये को निचोड़कर गर्म सिंकाई करें। इसके बाद ठंडे तौलिये से सिंकाई करें। इस उपचार क्रिया को कम से कम रोजाना 3 बार दोहराने से यह रोग ठीक होने लगता है।


• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए। इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।
• 5 से 10 ग्राम मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर सुबह पानी के साथ लें।
• 4 से 5 लहसुन की कलियों को एक पाव दूध में डालकर उबालकर पीयें।
• लहसुन के रस को कपूर में मिलाकर मालिश करने से भी दर्द से राहत मिलती है।
• लाल तेल से मालिश करना भी आरामदायक होता है।
• गर्म दूध में हल्दी मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीयें।
• सोने से पहले दर्द से प्रभावित क्षेत्र पर गर्म सिरके से मालिश करें।
• कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।
• कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।
• रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए। इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।
• शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।
• रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान लेना चाहिए। फिर इसके बाद इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।
• जोड़ों के दर्द से बचने के लिए सबसे अच्छा। योगासन है गोमुखआसन।
अर्थराइटिस जैसी बीमारी लम्बे समय तक रहती है इसलिए मरीज़ को दवाओं से ज्यादा बचाव और सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए। आज फीजि़योथेरेपी से लेकर नैचुरोपैथी तक में अर्थराइटिस के बहुत से समाधान निकाले गये हैं, लेकिन घरेलू नुस्खे और सावधानियां सबसे सुरक्षित उपचार हैं।
विशिष्ट परामर्श-  

     संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर निर्मित औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|

7.12.17

बाहर निकली तोंद को अंदर करने के अनुपम नुस्खे



बाहर निकला हुआ पेट अंदर करने के 10 आसान घरेलू तरीके
मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है। कुछ प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं, जिनके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। इसलिए यदि आप वजन कम करने के लिए बहुत मेहनत नहीं कर पाते हैं तो अपनाएं यहां बताए गए छोटे-छोटे उपाय। ये आपके बढ़ते वजन को कम कर देंगे।
1. पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती है।
2. दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
3. छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
4. आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं। कमर एकदम पतली हो जाएगी।
5. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
6. केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
7. रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही
रहता है।
8. मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
9. एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।
10. सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।

26.11.17

विटामिन ए के फायदे और स्रोत

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विटामिन वे आवश्यक कार्बनिक तत्व होते है जिनका निर्माण हमारा शरीर नहीं कर पाता. इनकी आवश्यकता हमारे शरीर को काफी अल्प मात्रा में होती है. शरीर में इनका उत्पादन पर्याप्त मात्रा में नहो हो सकता इसलिए इन्हें प्रतिदिन भोजन में लेना काफी जरुरी होता है. vitamins हमें काफी कम मात्रा में चाहिए होते है इसलिए इन्हें micro nutrients भी कहते है. हमारे शरीर को 13 प्रमुख विटामिन की जरुरत होती है जिसमे विटामिन ए, सी, डी, ई, के और विटामिन बी (थियामिन , राइबोफ्लेविन, नियासिन, पैंटोफेनीक एसिड, बायोटिन, विटामिन बी -6, विटामिन बी -12 और फोलेट) शामिल हैं। हर विटामिन का अपना एक कार्य होता है. अगर किसी भी विटामिन को कम मात्रा में लिया जाये तो इसके कारण कई तरह की समस्याएँ पैदा हो सकती है. उदाहरण के तौर पर vitamin A की कमी के कारण आखों से सम्बंधित समस्याएँ हो सकती है.
विटामिन ए वसा में घुलनशील विटामिन है। यह मुख्यतया रेटिनॉयड और कैरोटिनॉयड दो रूपों में पाया जाता है। सब्जियों का रंग जितना गहरा और चमकीला होगा, उनमें कैरोटिनॉयड की मात्र उतनी ही अधिक होगी। विटामिन शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप में चलाने में मदद करता है। हालांकि यह हमारे भोजन में विभिन्न रूपों में पर्याप्त रूप से रहता है, लेकिन अगर इसकी कमी भी हो तो इसकी पूर्ति के लिए प्राकृतिक स्रोतों का ही लाभ उठाना चाहिए।
विटामिन ए के उपयोग अच्‍छी सेहत के लिए यह सबसे महत्‍वपूर्ण विटामिन है। यह आंखों की रौशनी को तेज कर के उसकी मासपेशियों को मजबूत बनाता है। यह भ्रूण की नार्मल ग्रोथ और डेवलेप्‍मेंट के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है। त्‍वचा के लिए स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होता है। रक्त में कैल्सियम का स्तर बनाए रखने और हडिडयों के संवर्द्ध के लिए आवश्यक है।हडिडयों, दांत, और ऊतकों के रख-रखाव के लिए आवश्यक है। ऊर्जा पैदा करने के लिए सभी कोशिकाओं को इसकी जरुरत पडती है।स्वस्थ रहने के लिए विटामिन ए के दोनों रूपों का सेवन करना चाहिए। कैरोटिनॉयड रूप विशेष परिस्थितियों में रेटिनॉयड रूप में परिवर्तित हो जाता है।

किसे चाहिए अधिक विटामिन ए-
शाकाहारी लोगों और शराब का सेवन करने वालों को इसकी अधिक जरूरत होती है। लिवर की बीमारियों, सिस्टिक फाइब्रोसिस आदि से पीड़ित लोगों को भी विटामिन ए की आवश्यकता होती है। कई लोग समझते हैं कि विटामिन ए केवल एक विशेष पदार्थ होता है, जबकि इसमें पोषक तत्वों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है। हर पोषक पदार्थ के अपने लाभ होते हैं। अधिक मात्र में विटामिन ए का सेवन ‘विटामिन के’ के अवशोषण को प्रभावित करता है। वसा में घुलनशीन विटामिन के रक्त का थक्का बनाने के लिए जरूरी है।
विटामिन ए स्रोत-
चुकंदर, साग, ब्रोकली, साबुत अनाज, पनीर, गिरीदार फल, बटर, गाजर, मिर्च, डेयरी प्रोडक्‍ट, हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, अंडा, बींस, राजमा, मीट, आम, सरसों, पपीता, धनिया, चीकू, मटर, कद्दू, लाल मिर्च, सी फूड, शलजम, टमाटर, शकरकंद, तरबूत, मकई के दाने, पीले या नारंगी रंग के फल, कॉड लीवर ऑयल आदि।
अत्याधिक विटामिन ए लेने से शरीर पर अनेक दुर्प्रभाव हो सकते हैं जैसे कि सिरदर्द, देखने में दिक्कत, थकावट, दस्त, बाल गिरना, स्किन खराब हो जाना, हड्डी और जोडों में दर्द आदि की समस्या हो सकती है।

26.10.17

वीर्य गाढ़ा करने का अनुपम नुस्खा

  

वीर्य ही शारीर का सार है, एक योगी को सबसे ज्यादा दुःख अपने वीर्यपात होने पर ही होता है, मगर आज कल के युवा और आधुनिक डॉक्टर इसकी उतना नहीं आंकते, अत्यधिक मै आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें।
      इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।   मैथुन से या अश्लील सिनेमा और साहित्य से वीर्यपात कर चुके युवा जिनका वीर्य पानी की तरह हो चूका है, उनका जीवन नरक के समान है. वीर्य ही जीवन है, यही व्यक्ति का ओज़ है|,वीर्य को गाढ़ा और शक्तिशाली करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का ये प्रयोग बहुत लाभदायक है.|
वीर्य गाढ़ा करने के लिए सफ़ेद प्याज और अजवायन का प्रयोग.
एक किलो सफ़ेद प्याज का रस निकाल कर रख लीजिये, इसमें 100 ग्राम अजवायन को 12 घंटे तक सफेद प्याज के रस में भिगोएँ जिससे अजवाईन इसको सोख ले, सुबह जब सारा रस अजवायन सोख ले तो इसको छाया में सुखा लें।
सूखने के बाद उसे फिर से इसी तरह  प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें।

15.10.17

मिर्च खाएं, गठिया से निजात पाएं


वैज्ञानिकों की मानें तो तीखी मिर्च गठिया के दर्द से निजात दिला सकती है.
लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मिर्च के तीखेपन से गठिया के दर्द का इलाज संभव हो सकेगा.
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह शोध प्रारंभिक अवस्था में है लेकिन इससे गठिया की दवा तैयार हो सकेगी.
गठिया का रोग बड़ा कष्टप्रद माना जाता है और इसमें शरीर की प्रतिरोधी प्रणाली जोड़ों पर हमला करती है जिसकी वजह से उनमें दर्द, सूजन और कड़ापन आ जाता है.
एक अनुमान के अनुसार विश्वभर में लाखों लोग गठिया से पीड़ित हैं.  

केवल ब्रिटेन में ही छह लाख लोग इससे पीड़ित बताए जाते हैं.
प्रोफेसर सूसन ब्रेन के नेतृत्व में दो साल पहले एक शोध दल का गठन किया गया था.
यह दल इस बात की जाँच कर रहा है कि मिर्च का तीखा तत्व किस तरह गठिया की परेशानी से छुटकारा दिला सकता है.
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे एक नई दर्दनाशक दवा तैयार हो सकेगी. साथ ही इसके दुष्प्रभाव भी नहीं होंगे.
प्रोफेसर सूसन ब्रेन का कहना है कि सदियों से मिर्च में पाया जाना वाला कैपसेसिन कई तरह की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है.
दर्द में आराम दिलानेवाली ऐसी क्रीमें उपलब्ध हैं जिनमें कैपसेसिन होता है. लेकिन अब तक खानेवाली दवा के रूप में इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है.
उनका कहना है कि कई दवा कंपनियों ने उनके इस शोध में दिलचस्पी दिखाई है.